
पंजाब सरकार राज्य में शहरी ढांचा और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए अब मोहाली और न्यू चंडीगढ़ को नए विकास केंद्रों के रूप में तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकार की योजना के अनुसार, मोहाली में नौ नए सेक्टर और न्यू चंडीगढ़ में दो नई टाउनशिप विकसित की जाएंगी। इसके लिए कुल 5100 एकड़ से अधिक भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा 11 के तहत मोहाली में 4059 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी। यह अधिसूचना आने वाले कुछ हफ्तों में देखने को मिल सकती है, जिसके बाद भूमि सर्वेक्षण और मुआवजा प्रक्रिया शुरू होगी।
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एयरोट्रोपोलिस और नए सेक्टरों के लिए अधिग्रहण
राज्य सरकार की योजना का सबसे बड़ा हिस्सा मोहाली के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित एयरोट्रोपोलिस परियोजना के विस्तार से जुड़ा हुआ है। इसके लिए 3535 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा, जिससे एयरोट्रोपोलिस के ब्लॉक ई से जे तक विस्तार हो सकेगा।
इसके अलावा, सरकार ने सेक्टर 87 (वाणिज्यिक), सेक्टर 101 (आंशिक) और सेक्टर 103 (औद्योगिक) के लिए लगभग 524 एकड़ भूमि आरक्षित की है। इनसे न केवल शहरी ढांचे को बढ़ावा मिलेगा बल्कि क्षेत्र में रोज़गार और व्यापारिक अवसर भी बढ़ेंगे। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से पहले जो सामाजिक प्रभाव आकलन किया जाना जरूरी होता है, वह पूरा कर लिया गया है और विशेषज्ञ समिति ने इसे मंजूरी भी दे दी है।
न्यू चंडीगढ़ में दो नई टाउनशिप की योजना
न्यू चंडीगढ़ पहले से ही पंजाब सरकार की शहरी विकास नीति का अहम हिस्सा रहा है। अब सरकार यहाँ दो नई टाउनशिप विकसित करने जा रही है। इसके लिए 1048 एकड़ भूमि का अधिग्रहण शुरू किया गया है।
इनमें से 720 एकड़ भूमि इको सिटी-3 के लिए और 328 एकड़ भूमि मेडिसिटी के पास एक नई टाउनशिप के लिए उपयोग की जाएगी। संबंधित मुआवजा दस्तावेज तैयार कर लिए गए हैं और संभावना है कि सरकार जल्द ही इन्हें सार्वजनिक कर देगी, ताकि जमीन पर निर्माण और विकास कार्य शुरू किए जा सकें।
भूमि अधिग्रहण नीति में बड़ा बदलाव
पंजाब सरकार ने इस वर्ष जून में अपनी ‘भूमि संचय नीति’ के तहत 6200 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण को मंजूरी दी थी। इस नीति में किसानों को नकद मुआवजे की बजाय विकसित भूखंड दिए जाने का प्रावधान था। मगर किसानों के विरोध और हाई कोर्ट के अंतरिम रोक आदेश के कारण सरकार को यह नीति अगस्त में वापस लेनी पड़ी।
अब सरकार ने इस नीति की जगह पुराना भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 दोबारा लागू किया है। इस कानून के तहत भूमि मालिकों को बाजार दर के अनुसार नकद मुआवजा, विस्थापन भत्ता और पुनर्वास लाभ दिया जाएगा। इस बदलाव को कई किसान संगठनों ने राहतभरा कदम बताया है क्योंकि इससे उन्हें अपनी ज़मीन की कीमत का पारदर्शी मूल्यांकन मिलेगा।
किसानों की चिंताएं और प्रक्रिया की पारदर्शिता
पहली नीति यानी “पूलिंग पॉलिसी” में किसानों की सहमति अनिवार्य नहीं थी और सरकार को भूमि विकसित कर भूखंड आवंटित करने का अधिक अधिकार था। इससे किसानों को डर था कि कहीं वे अपनी जमीन पर नियंत्रण न खो दें।
वहीं, अब लागू किए गए भूमि अधिग्रहण अधिनियम में सामाजिक प्रभाव आकलन, सार्वजनिक सुनवाई और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है। इसका अर्थ यह है कि हर चरण में पारदर्शिता रहेगी और किसानों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
विकास के नए आयाम
मोहाली और न्यू चंडीगढ़ का संयुक्त विकास पंजाब के शहरी ढांचे में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। एयरोट्रोपोलिस, इको सिटी और नई टाउनशिप जैसे प्रोजेक्ट्स राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इन प्रोजेक्ट्स के जरिए निवेश आकर्षित किया जाए और स्थानीय लोगों को नए रोजगार अवसर मिलें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना तय समय सीमा में लागू होती है, तो मोहाली क्षेत्र उत्तर भारत के सबसे प्रमुख शहरी हब्स में शामिल हो सकता है।

















