बिहार में 45 दिनों में छीन ली जाएगी आपकी जमीन! 7 तरह की संपत्तियों पर सरकार की टेढ़ी नजर, तुरंत करा लें सुधार

अवैध जमाबंदी रद्दीकरण अभियान शुरू, जिला अधिकारी और समाहर्ता जिम्मेदार। सरकारी, पंचायत और धार्मिक ट्रस्ट की जमीन पर कार्रवाई तय, देर होने से पहले अपने दस्तावेज़ों की जांच जरूरी।

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बिहार में 45 दिनों में छीन ली जाएगी आपकी जमीन! 7 तरह की संपत्तियों पर सरकार की टेढ़ी नजर, तुरंत करा लें सुधार
बिहार में 45 दिनों में छीन ली जाएगी आपकी जमीन! 7 तरह की संपत्तियों पर सरकार की टेढ़ी नजर, तुरंत करा लें सुधार

बिहार सरकार ने सरकारी जमीन पर अवैध जमाबंदी (Fake Jamabandi) को रद्द करने और भूमि विवाद (Land Dispute) के समाधान के लिए बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (Revenue and Land Reforms Department) के प्रधान सचिव सी.के. अनिल (CK Anil) ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी (DM) और अपर समाहर्ताओं को निर्देश जारी करते हुए कहा कि सात प्रकार की सरकारी जमीन पर अवैध जमाबंदी (Unauthorized Jamabandi) को 45 दिनों के भीतर रद्द किया जाएगा।

सात प्रकार की सरकारी जमीन पर कार्रवाई

प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने स्पष्ट किया कि सर्वे खतियान (Survey Khatian) में जिन जमीनों पर अवैध जमाबंदी हुई है, उन्हें रद्द किया जाएगा। इन सात प्रकार की जमीनों में शामिल हैं:

  1. गैर मजरुआ आम जमीन (Non-Marjua Common Land) – जो सामान्य उपयोग के लिए आरक्षित थी।
  2. कैसरे-हिंद (Kasre-Hind) – विशेष सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन।
  3. खास महाल की जमीन (Special Mahal Land) – जिसकी पहले विधि सम्मत बंदोबस्ती (Legal Settlement) नहीं हुई थी।
  4. जिला परिषद, नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम और ग्राम पंचायत की भूमि (District Council, Nagar Panchayat, Nagar Parishad, Municipal Corporation, Gram Panchayat Land) – यदि इस पर जमाबंदी गलत तरीके से की गई हो।
  5. राज्य सरकार के विभाग, बोर्ड, निगम या बीयाड़ा से संबंधित भूमि (State Government Department/Board/Corporation Land)
  6. भारत सरकार के मंत्रालय से संबंधित भूमि (Central Government Ministry Land)
  7. धार्मिक न्यास बोर्ड, सरकारी-अर्द्ध सरकारी ट्रस्ट, गौशाला से संबंधित जमीन (Religious Trust/Govt or Semi-Govt Trust/Cow Shelter Land)

अपर समाहर्ता (Additional Collector) इन सभी जमीनों पर अवैध जमाबंदी रद्द करने के लिए जिम्मेदार होंगे और यह प्रक्रिया 31 जनवरी 2026 तक पूरी करनी होगी।

अंचल अधिकारी और जिलाधिकारी की जिम्मेदारी

प्रधान सचिव ने अंचल अधिकारियों को स्पष्ट किया कि वे 3 जून 1974 से अंचल की सरकारी जमीन के कलेक्टर घोषित हैं। यदि उनके कार्यकाल के दौरान कोई अवैध जमाबंदी या निजी हस्तांतरण पाया जाता है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यदि किसी सरकारी जमीन पर निजी व्यक्तियों के नाम पर जमाबंदी खोली गई है और दाखिल खारिज (Dakhil Kharij) की गई है, तो संबंधित अंचल अधिकारी विभागीय कार्यवाही के लिए जिम्मेदार होंगे। इसके लिए अधिकारियों को पुराने अभिलेखों (Land Records) का निरीक्षण कर चिन्हित मामलों की रिपोर्ट सीधे अपर समाहर्ता को भेजनी होगी।

समाहर्ता की भूमिका

समाहर्ता (Collector/DM) को सरकारी जमीन के संरक्षक के रूप में कार्य करना होगा। प्रधान सचिव ने निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्र में जमाबंदी रद्दीकरण अभियान (Jamabandi Cancellation Drive) का पर्यवेक्षण करें। इसका मुख्य उद्देश्य है:

  • अवैध जमाबंदी को रद्द कर सरकारी जमीन की वापसी।
  • लैंड बैंक (Land Bank) का निर्माण जिला और अंचल स्तर पर।
  • सरकारी भूमि के संरक्षण और निगरानी को सुनिश्चित करना।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कहा कि इस अभियान की पूर्ण जिम्मेदारी जिला स्तर पर समाहर्ता की होगी।

बिहार भूमि सुधार में बड़ा कदम

यह पहल राज्य सरकार के भूमि सुधार (Land Reforms) और सरकारी जमीन संरक्षण (Government Land Protection) के महत्व को दर्शाती है। इसके अलावा, यह कदम अवैध कब्जों (Encroachments) को रोकने और भूमि विवादों को दूर करने में सहायक होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस अभियान से न केवल सरकारी जमीन की वापसी होगी, बल्कि सशक्त लैंड मैनेजमेंट सिस्टम (Strong Land Management System) भी स्थापित होगा। इससे भविष्य में भूमि विवाद और अवैध जमाबंदी की घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

समाचार का सारांश

  • बिहार सरकार ने सरकारी जमीन पर अवैध जमाबंदी रद्द करने का आदेश दिया।
  • सात प्रकार की सरकारी जमीन इस अभियान के तहत आती हैं।
  • अंचल अधिकारी और जिलाधिकारी (DM) जिम्मेदार होंगे।
  • अवैध जमाबंदी की जांच और रद्दीकरण की प्रक्रिया 45 दिनों में पूरी करनी है।
  • अभियान का उद्देश्य सरकारी भूमि की वापसी और लैंड बैंक का निर्माण है।
Author
indsocplantationcrops

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