भारत का इकलौता रेलवे स्टेशन जहाँ रविवार को ‘मौन’ रहती हैं ट्रेनें! क्यों नहीं बजाया जाता हॉर्न? चौंका देगी वजह

भारत का अनोखा रेलवे स्टेशन जहां रविवार को ट्रेन की सीटी तक नहीं बजती! पश्चिम बंगाल के बर्धमान के पास बसा ये नामरहित स्टेशन पूरी तरह बंद रहता है। स्टेशन मास्टर टिकट लेने चले जाते हैं, सिर्फ सन्नाटा छाया रहता है। बांकुड़ा पैसेंजर का एकमात्र पड़ाव, पुराने जमाने की याद दिलाता।

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भारत का इकलौता रेलवे स्टेशन जहाँ रविवार को 'मौन' रहती हैं ट्रेनें! क्यों नहीं बजाया जाता हॉर्न? चौंका देगी वजह

हमारा देश रेलवे के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क चलाता है, लेकिन कुछ स्टेशन अपनी अनोखी कहानियों के लिए मशहूर हैं। नवापुर स्टेशन तो महाराष्ट्र और गुजरात की सीमा पर बंटा हुआ है। अटारी स्टेशन पर बिना वीजा के घुसना मुश्किल। फिर वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपेटा नाम का वो लंबा स्टेशन, जिसका नाम पढ़ते ही जीभ लड़खड़ा जाए।

ऐसे स्टेशनों में एक और खास है पश्चिम बंगाल का वो छोटा सा पड़ाव। बर्धमान से महज 35 किलोमीटर दूर बसा ये स्टेशन बांकुड़ा-मासाग्राम पैसेंजर ट्रेन का एकमात्र ठिकाना है। लेकिन इसकी असली पहचान कुछ और है।

रविवार को पूरी खामोशी का राज

रविवार को इस स्टेशन पर ऐसा सन्नाटा छा जाता है मानो कोई भूतिया इलाका हो। न ट्रेन आती है, न हॉर्न बजता है, न ही कोई अनाउंसमेंट सुनाई देती। सिर्फ पंछियों की चहचहाहट और हवा की सरसराहट। पैसेंजर ट्रेन जो बाकी दिन रुकती है, वो भी रविवार को नजर नहीं आती। स्टेशन मास्टर और टिकट काउंटर सब बंद।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टेशन मास्टर रविवार को टिकट के लिए बर्धमान शहर चले जाते हैं। छोटा सा स्टेशन होने से कोई और स्टाफ नहीं होता। इसलिए पूरा दिन स्टेशन खाली पड़ा रहता है। सोचिए, पुराने जमाने में ऐसे स्टेशन गांव वालों के लिए वरदान थे, आज लगता है जैसे समय ठहर सा गया हो।

क्यों बने थे ऐसे छोटे स्टेशन?

दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों को रेल सेवा देने के लिए ही ये छोटे स्टेशन बने। बिना नाम के ये पड़ाव स्थानीय यात्रियों का सहारा बने। बांकुड़ा या मासाग्राम जाने वाले लोग यहीं उतरते-चढ़ते। लेकिन ई-टिकटिंग और बड़े स्टेशनों के आने से इनकी चमक फीकी पड़ गई।

फिर भी ये स्टेशन आज भी जरूरी है। सुबह-शाम पैसेंजर ट्रेन रुकती है, लोग चढ़ते-उतरते। बस रविवार को एक दिन की छुट्टी। रेलवे हर रविवार ट्रैक मरम्मत के लिए ब्लॉक लेता है, इसलिए कई ट्रेनें प्रभावित होती हैं। लेकिन यहां तो स्टेशन ही बंद हो जाता है।

भारतीय रेलवे का कमाल

वंदे भारत स्लीपर जैसी नई ट्रेनों के जमाने में भी पुराने स्टेशन अपनी कहानी कहते हैं। रेलवे ने सैकड़ों स्टेशनों का कायाकल्प किया, लेकिन ये छोटे स्टेशन वही पुराना फ्लेवर देते हैं। NTES या RailYatri ऐप पर स्टेटस चेक करना न भूलें, खासकर रविवार को। स्थानीय लोग इसे प्यार से “नामरहित स्टेशन” कहते हैं। कोई बोर्ड नहीं, कोई भीड़ नहीं। बस एक प्लेटफॉर्म और ट्रेन का इंतजार। ये स्टेशन बताता है कि रेलवे सिर्फ बड़ी उपलब्धियां ही नहीं, छोटी-छोटी कहानियां भी समेटे हुए है।

कभी इस स्टेशन पर रुकने का मौका मिले, तो रविवार को जरूर जाइए। सन्नाटे में बैठकर चाय पीते हुए पुरानी यादें ताजा करेंगे। भारतीय रेलवे यही तो है, आधुनिकता और पुरानी यादों का अनोखा संगम।

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indsocplantationcrops

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