
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में बेसहारा घूम रहे पशुओं की समस्या का समाधान निकालने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है,साल 2026 की शुरुआत के साथ ही पशुपालन विभाग ने ‘ग्राम गौर सेवक योजना’ और ‘गौशाला योजना’ को पूरे प्रदेश में विस्तार दे दिया है, इस योजना के तहत अब बेसहारा पशुओं को पालना केवल पुण्य का काम नहीं, बल्कि कमाई का एक बड़ा जरिया भी बन गया है।
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हर महीने होगी ₹12,000 तक की पक्की कमाई
सरकार के नए प्लान के मुताबिक, कोई भी ग्रामीण व्यक्ति आवारा नर पशुओं (सांड या बैल) को अपने घर पर पाल सकता है। इसके लिए सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जाएगी:
- प्रति पशु भुगतान: सरकार एक पशु को पालने के बदले ₹80 प्रतिदिन का भुगतान करेगी।
- अधिकतम सीमा: ‘ग्राम गौर सेवक योजना’ के तहत एक व्यक्ति अधिकतम 5 पशु पाल सकता है।
- मासिक आय: यदि आप 5 आवारा पशुओं को पालते हैं, तो ₹400 प्रतिदिन के हिसाब से आपकी मासिक कमाई ₹12,000 होगी।
योजना की मुख्य विशेषताएं और लाभ
- पाले गए पशुओं के टीकाकरण और उपचार की पूरी जिम्मेदारी पशुपालन विभाग की होगी, जो बिल्कुल मुफ्त दी जाएगी।
- जो लोग बड़े स्तर पर (5 से अधिक) पशुओं को आश्रय देना चाहते हैं, वे ‘गौशाला योजना’ के तहत पंजीकरण करा सकते हैं। वहां भी सरकार प्रति पशु ₹80 की दर से सहायता राशि देगी।
- इस पहल का उद्देश्य फसलों को आवारा पशुओं से होने वाले नुकसान से बचाना और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार देना है।
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किसे मिलेगा लाभ और कैसे करें आवेदन?
यह योजना वर्तमान में उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों के लिए प्रभावी है, आवेदन करने के लिए इच्छुक व्यक्ति को निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:
- अपने नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय या मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) कार्यालय में संपर्क करें।
- आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होगी।
- योजना की विस्तृत जानकारी और ऑनलाइन सहायता के लिए आप उत्तराखंड पशुपालन विभाग (AHD) की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के माध्यम से सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आए और किसानों की मेहनत की फसल को बचाया जा सके, यदि आप भी इस योजना से जुड़ना चाहते हैं, तो विभाग द्वारा जारी टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर जानकारी ले सकते हैं।

















