उत्तर प्रदेश के किसान भाइयों, अगर आपके खेतों में पानी की किल्लत है और फसलें सूखने की कगार पर पहुंच रही हैं, तो चिंता न करें। सामूहिक नलकूप योजना आपके लिए वरदान साबित हो सकती है। इस योजना से समूह बनाकर एक ही नलकूप लगवाकर कई खेतों को सींच सकते हैं, वो भी सरकार की मोटी सब्सिडी के साथ। यह योजना खासतौर पर उन इलाकों के लिए है जहां पारंपरिक सिंचाई के साधन कमजोर हैं।

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योजना की खासियतें
सामूहिक नलकूप योजना में किसानों का छोटा-मोटा समूह मिलकर एक खेत में बोरिंग करवाता है। इससे हर सदस्य को सस्ते में पानी मिल जाता है। सरकार ने इसमें रजिस्ट्रेशन का कोई शुल्क नहीं रखा है, जिससे आवेदन प्रक्रिया आसान हो जाती है। योजना का मकसद छोटे किसानों को सशक्त बनाना है, ताकि वे सूखे का डर छोड़कर बेहतर उत्पादन कर सकें। यह न केवल पानी की बचत करती है, बल्कि बिजली और रखरखाव का खर्च भी कम करती है।
मिलने वाले लाभ
इस योजना के तहत नलकूप खुदाई पर प्रति मीटर 1200 रुपये की दर से 80 प्रतिशत की भारी छूट मिलती है, यानी 960 रुपये प्रतिमीटर सीधे सरकार देगी। यह सब्सिडी अधिकतम 70 मीटर गहराई तक लागू होती है। ऊपर से 5 एचपी के सबमर्सिबल पंप पर 30,000 रुपये तक का अतिरिक्त अनुदान भी जोड़ा जाता है। इससे किसान समूह को कुल मिलाकर लाखों रुपये की बचत हो जाती है। नतीजा? ज्यादा सिंचाई, बेहतर फसलें और बढ़ी आय। सूखाग्रस्त इलाकों में यह योजना किसानों की जिंदगी बदल रही है।
कौन ले सकता है लाभ?
योजना का फायदा उठाने के लिए सबसे पहले उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना जरूरी है। समूह में कम से कम दो किसान होने चाहिए, जो पड़ोसी खेतों के मालिक हों। महत्वपूर्ण बात, कोई भी सदस्य अगले 7 साल तक दोबारा इस योजना का लाभ नहीं ले पाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों तक मदद पहुंचे। जमीन का रिकॉर्ड साफ होना चाहिए और सिंचाई की वास्तविक जरूरत साबित करनी होगी।
जरूरी कागजात
आवेदन के समय ये दस्तावेज साथ रखें: सभी सदस्यों का आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी। आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और राशन कार्ड भी लगेंगे। मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए और पासपोर्ट साइज फोटो जरूर लगाएं। ये कागजात सत्यापन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
आवेदन की आसान प्रक्रिया
सबसे पहले नजदीकी कृषि सिंचाई विभाग के कार्यालय पहुंचें। वहां योजना की स्थिति पूछें – क्या आपके क्षेत्र में यह चल रही है। हां तो फॉर्म लें। समूह के सभी सदस्य मिलकर फॉर्म भरें, दस्तावेज जोड़ें और हस्ताक्षर करें। अधिकारी को सौंप दें। उसके बाद खेत की नापजोख हो जाएगी। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो बोरिंग का काम शुरू हो जाएगा। प्रक्रिया सरल है, बस समय पर कदम उठाएं।

















