
उत्तर प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए अलर्ट! इस जनवरी 2026 में सैलरी रुकने का खतरा मंडरा रहा है। वजह? अपनी संपत्ति का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड न करना। सरकार सख्ती पर उतर आई है – पारदर्शिता के नाम पर। अगर आपने अभी तक ये काम नहीं किया, तो परेशानी हो सकती है। आइए, स्टेप बाय स्टेप समझते हैं ये पूरा मामला, जैसे घर बैठे चाय की चुस्की लेते हुए बात हो रही हो।
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संपत्ति घोषणा का ये हल्ला क्यों मचा है?
सोचिए, आपकी मेहनत की कमाई अचानक रुक जाए सिर्फ इसलिए कि आपने अपनी प्रॉपर्टी का हिसाब नहीं दिया। यूपी सरकार ने पारदर्शिता लाने के चक्कर में मानव संपदा पोर्टल को अनिवार्य बना दिया। हर कर्मचारी को अपनी और परिवार की चल-अचल संपत्ति का डिटेल ehrms.upsdc.gov.in पर डालनी है।
ये कदम भ्रष्टाचार रोकने के लिए है। मुख्य सचिव के आदेश साफ – बिना घोषणा, कोई सैलरी नहीं। जनवरी का महीना आ गया, डेडलाइन नजदीक। लाखों टीचर, क्लर्क, अफसर – सब परेशान। लेकिन चिंता मत करो, आज ही काम शुरू कर दो।
मानव संपदा पोर्टल क्या है, कैसे काम करता है?
मानव संपदा पोर्टल यूपी सरकार का वो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जहां आपकी सर्विस बुक, प्रमोशन, सैलरी सब मैनेज होता है। अब इसमें संपत्ति का कॉलम जोड़ा गया। लॉगिन करो, प्रोफाइल ओपन करो, और डिटेल्स भर दो। URL है ehrms.upsdc.gov.in – मोबाइल या कंप्यूटर से एक्सेस कर सकते हो।
अगर पहली बार है, तो अपना कर्मचारी आईडी और पासवर्ड यूज करो। भूल गए? विभाग के नोडल ऑफिसर से रीसेट करवा लो। ये पोर्टल पहले से चल रहा है, बस अब सख्ती बढ़ गई। तुरंत चेक कर लो, वरना सैलरी जेनरेट ही नहीं होगी।
क्या-क्या संपत्ति का ब्योरा देना पड़ेगा?
सबसे बड़ा सवाल – आखिर क्या घोषित करना है? अपनी, पत्नी-बच्चों की हर संपत्ति। जमीन-खेत का प्लॉट नंबर, मकान का एरिया, कार-बाइक का मॉडल, सोने-चांदी का वजन, बैंक FD, शेयर, म्यूचुअल फंड – सब कुछ। सालाना इनकम का सोर्स भी बताना।
पुरानी संपत्ति भी, नई खरीदी भी। वैल्यूेशन करीब-करीब सही रखो। फॉर्म आसान है – कैटेगरी चुनो, डिटेल भर दो, डॉक्यूमेंट अपलोड। 2-3 घंटे का काम, लेकिन अगर टालोगे तो महीने भर का नुकसान। सरकार कह रही – झूठ बोला तो एक्शन!
सैलरी क्यों रुकेगी? सरकार की सख्ती का राज
अब असली बात – सैलरी क्यों अटकेगी? क्योंकि पोर्टल पर संपत्ति डेटा बिना सैलरी डेटा जेनरेट नहीं होता। मुख्य सचिव का सर्कुलर साफ: घोषणा न करने वालों का वेतन आहरण रोक दो। ये जनवरी 2026 से लागू। पहले चेतावनी मिलेगी, फिर रोक।
पिछले साल भी ऐसा कुछ हुआ था, लेकिन अब फुल सख्ती। उद्देश्य? भ्रष्टाचार उजागर करना। अमीर अफसरों की संपत्ति सोर्स चेक होगी। कर्मचारी भ्रष्टाचार के जाल में फंसने से बचेंगे। लेकिन हकीकत में कईयों को तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं – पोर्टल हैंग, पासवर्ड इश्यू।
डेडलाइन क्या है? अभी कितना टाइम बचा?
सरकार ने साफ समयसीमा दी है – जनवरी के पहले हफ्ते तक। आज 8 जनवरी है, तो जल्दी करो! अगर मिस हो गया, तो फरवरी तक इंतजार। लेकिन अफसर कह रहे – लेट फीस या एक्सटेंशन मिल सकता है, पर गारंटी नहीं। विभागवार नोटिफिकेशन चेक करो। ग्रामीण इलाकों के कर्मचारियों को दिक्कत ज्यादा – इंटरनेट स्लो। साइबर कैफे या मोबाइल डेटा यूज करो। सेंटर पर जाकर भी मदद लो। देर मत करो, वरना घर का बजट बिगड़ जाएगा।
कैसे अपडेट करें प्रोफाइल?
चलिए, आसान गाइड। पहले ehrms.upsdc.gov.in पर जाओ। लॉगिन: कर्मचारी कोड + पासवर्ड। डैशबोर्ड में ‘संपत्ति घोषणा’ सेक्शन ढूंढो। नई एंट्री ऐड करो।
- जमीन: खसरा नंबर, क्षेत्रफल।
- मकान: बिल्ट-अप एरिया, लोकेशन।
- वाहन: रजिस्ट्रेशन नंबर।
- ज्वेलरी: ग्राम, वैल्यू।
- निवेश: अकाउंट डिटेल्स।
सब भरने के बाद सबमिट। प्रिंटआउट ले लो रिकॉर्ड के लिए। दिक्कत हो तो हेल्पलाइन 0522-2236881 पर कॉल। 30 मिनट में हो जाएगा!
क्यों जरूरी है ये कदम? फायदे क्या हैं?
सतह पर सख्ती लगे, लेकिन फायदे भी हैं। आपकी संपत्ति रिकॉर्ड होगा, प्रमोशन में पारदर्शिता आएगी। भ्रष्टाचार के आरोप से बचोगे। सरकार को डेटा मिलेगा नीतियां बनाने को। लॉन्ग टर्म में सिस्टम क्लीन होगा। लेकिन चुनौतियां भी – प्राइवेसी का डर, पुरानी संपत्ति साबित करने में दिक्कत। फिर भी, आज के जमाने में डिजिटल ट्रांसपेरेंसी जरूरी। यूपी जैसे बड़े राज्य में ये मिसाल बनेगी।
क्या करें अगर दिक्कत आए? टिप्स और सलाह
पासवर्ड फॉरगॉट? विभाग हेड से रीसेट। पोर्टल क्रैश? रात 10 बजे ट्राई करो। डॉक्यूमेंट न हो? अफिडेविट बना लो। यूनियन से बात करो अगर डेडलाइन बढ़े। साथ ही, फैमिली से डिटेल्स कलेक्ट कर लो। सबको शामिल करो। ये एक बार का काम, साल में अपडेट बस। तनाव मत लो, एक्शन लो!
आखिरी चेतावनी
जनवरी की सैलरी पर नजर है सबकी। सरकार पीछे नहीं हटेगी। आज ही लॉगिन करो, घोषणा करो। वरना, फाइनेंशियल क्राइसिस हो जाएगा। ये पारदर्शिता का दौर है – अपनाओ या पीछे रह जाओ। यूपी के कर्मचारियों, जागो!

















