
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट छात्रों के लिए प्री-बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम को लेकर तैयारी पूरी कर ली है। इस बार बोर्ड ने एक नया कदम उठाया है, अब प्रत्येक जिले में परीक्षा का आयोजन, समय-सारिणी और संचालन की ज़िम्मेदारी जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के हाथों में होगी। यानी, परीक्षा का तरीका तो समान रहेगा, लेकिन तारीखें और कार्यक्रम प्रत्येक जिले के हिसाब से तय होंगे।
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जिलों को मिली छूट, जिम्मेदारी भी बड़ी
यूपी बोर्ड ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा कार्यक्रम जारी करें। इस बदलाव का उद्देश्य है कि जिले अपनी परिस्थितियों और विद्यालयों की संख्या को ध्यान में रखकर कार्यक्रम बना सकें। हालांकि, एक बात स्पष्ट कर दी गई है “परीक्षा पूरी शुचिता और पारदर्शिता के साथ कराई जानी चाहिए।”
बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने कहा कि सभी जिलों को समय-सारिणी खुद बनाने की अनुमति दी गई है। बोर्ड की ओर से सभी विषयों के प्रश्नपत्र पहले ही तैयार कर जिलों में भेज दिए गए हैं। प्रत्येक जिले में एक केंद्र से इन प्रश्नपत्रों का वितरण किया जा रहा है। प्रयागराज में इसके लिए जीआईसी (गवर्नमेंट इंटर कॉलेज) को जिम्मेदारी दी गई है।
प्रयागराज में 6 जनवरी से शुरुआत
प्रयागराज जिला प्रशासन ने अपनी समय-सारिणी जारी कर दी है। यहां प्री-बोर्ड परीक्षाएं 6 जनवरी से शुरू होंगी। हालांकि, कुछ विषय जैसे ‘संगीत’ आदि को फिलहाल इस टाइमटेबल में शामिल नहीं किया गया है, जिससे छात्रों और शिक्षकों के बीच थोड़ी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक पी.एन. सिंह ने साफ कहा है कि परीक्षाएं तय समय पर ही होंगी और जो विषय छूटे हैं, उनकी परीक्षा स्कूल अपने स्तर से कराएंगे।
यह है प्रयागराज की परीक्षा तिथि-सारिणी
- 6 जनवरी: हाईस्कूल और इंटरमीडिएट — हिंदी
- 7 जनवरी: अंग्रेजी
- 8 जनवरी: गणित, गृह विज्ञान, जीव विज्ञान, इतिहास
- 9 जनवरी: विज्ञान (हाईस्कूल), भौतिक विज्ञान और समाजशास्त्र (इंटरमीडिएट)
- 10 जनवरी: सामाजिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, भूगोल, उर्दू
- 12 जनवरी: चित्रकला, अर्थशास्त्र
- 13 जनवरी: संस्कृत, उर्दू, नागरिक शास्त्र, लेखाशास्त्र
- 15 जनवरी: वाणिज्य, कंप्यूटर, संस्कृत
- 16 जनवरी: इंटरमीडिएट की गृह विज्ञान परीक्षा
यह कार्यक्रम देखने में कॉम्पैक्ट जरूर लग रहा है, लेकिन कोशिश यही रखी गई है कि विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा के तनाव और वातावरण को पहले से महसूस कर सकें।
परीक्षा का उद्देश्य: तैयारी और फीडबैक
यूपी बोर्ड इस बार प्री-बोर्ड को सिर्फ औपचारिकता नहीं मान रहा। सचिव भगवती सिंह ने कहा है कि परीक्षा के बाद शिक्षकों को कापियों का गंभीरता से मूल्यांकन करना होगा और छात्रों से संवाद स्थापित कर उनकी कमियों पर चर्चा करनी होगी। इसका उद्देश्य है कि बच्चे अपनी कमजोरियों को पहचानकर मुख्य बोर्ड परीक्षा से पहले सुधार कर सकें।
यह प्रयास छात्रों को मानसिक रूप से भी तैयार करने के लिए किया जा रहा है ताकि वे वास्तविक बोर्ड परीक्षा में आत्मविश्वास के साथ जाएं। इसके लिए शिक्षकों से उम्मीद की जा रही है कि वे प्री-बोर्ड को ‘मॉक टेस्ट’ की तरह नहीं, बल्कि एक प्रशिक्षण अवसर की तरह संभालें।
प्रश्नपत्र वितरण की व्यवस्था
बोर्ड ने प्रदेश के प्रत्येक जिले के लिए प्रश्नपत्रों के बंडल तैयार कर भेज दिए हैं। ये बंडल छात्रसंख्या के अनुसार तैयार किए गए हैं ताकि किसी विषय में पेपर की कमी न रहे। प्रयागराज में जीआईसी से सभी स्कूलों को प्रश्नपत्र लेने होंगे। उन्हें अपने स्तर से इसे सुरक्षित तरीके से स्कूल तक लाने की जिम्मेदारी दी गई है।
हालांकि, खबरें हैं कि कुछ विद्यालय अभी तक प्रश्नपत्र प्राप्त नहीं कर पाए हैं, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि कुछ स्कूलों में पहली परीक्षा की तारीख आगे बढ़ सकती है। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस संभावना से साफ इनकार किया गया है।

















