
शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत स्कूलों में प्रवेश लेने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है, नई व्यवस्था के अनुसार, अब निजी स्कूलों में दाखिले के लिए बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा, यदि बच्चे का आधार कार्ड नहीं बना है, तो अभिभावक अपने आधार कार्ड के जरिए पंजीकरण और प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
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डीएम की सीधी निगरानी में होगी प्रक्रिया
प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी प्रकार की धांधली को रोकने के लिए सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं अब जिलों में पूरी प्रवेश प्रक्रिया की कमान जिलाधिकारी (DM) के हाथों में होगी, डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ही आवेदनों का सत्यापन और सीटों के आवंटन की निगरानी करेगी, ताकि पात्र बच्चों को ही योजना का लाभ मिल सके।
फर्जीवाड़े और डुप्लीकेसी पर लगेगी लगाम
अधिकारियों के अनुसार, कई बार एक ही छात्र का विवरण अलग-अलग स्कूलों में भरकर फर्जीवाड़े की शिकायतें आती थी अभिभावक के आधार को लिंक करने से डेटा का दोहराव (Duplication) रुकेगा और सिस्टम में पारदर्शिता आएगी, पोर्टल पर आधार आधारित सत्यापन के बाद ही आवेदन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
मुख्य दिशा-निर्देश
- बच्चे का आधार कार्ड उपलब्ध न होने की स्थिति में माता-पिता का आधार मान्य होगा।
- ब्लॉक और जिला स्तर पर शिक्षा विभाग के अधिकारी दस्तावेजों की गहन जांच करेंगे।
- यदि किसी अभिभावक को आवेदन में समस्या आती है, तो वे सीधे जिला शिक्षा अधिकारी या डीएम कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
सरकार का यह कदम उन हजारों गरीब परिवारों के लिए मददगार साबित होगा जो दस्तावेजी औपचारिकताओं के कारण अपने बच्चों का दाखिला कराने से वंचित रह जाते थे, इस नई व्यवस्था से शैक्षणिक सत्र 2026 के लिए होने वाले दाखिलों में तेजी आने की उम्मीद है।

















