Property Rights: संपत्ति विवाद में भाई की ‘अपंजीकृत वसीयत’ फेल! हाई कोर्ट ने बेटी को दिलाया हक, जानें रजिस्ट्री न होने पर क्या होता है?

इलाहाबाद हाईकोर्ट का धमाकेदार फैसला! अपंजीकृत वसीयत से बेटी का पैतृक संपत्ति में हक नहीं छीना जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा- बेटी जन्म से coparcener है, भाई को गवाहों से वसीयत साबित करनी होगी। हिंदू उत्तराधिकार 2005 कानून मजबूत, बेटियों को बराबर हिस्सा मिलेगा।

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Property Rights: संपत्ति विवाद में भाई की 'अपंजीकृत वसीयत' फेल! हाई कोर्ट ने बेटी को दिलाया हक, जानें रजिस्ट्री न होने पर क्या होता है?

इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले ने साफ संदेश दिया है कि सिर्फ कागजों के खेल से अब बेटियों का हक नहीं छीना जा सकता, खासकर जब बात अपंजीकृत वसीयत की हो। यह निर्णय हिंदू उत्तराधिकार कानून के उस मूल सिद्धांत को मजबूत करता है, जिसमें बेटा‑बेटी दोनों को पैतृक संपत्ति में बराबर सह-दायिक माना गया है।

हाई कोर्ट का फैसला

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल में एक मामले में कहा कि यदि भाई अपने पिता की अपंजीकृत वसीयत दिखाकर पूरी पैतृक संपत्ति पर अधिकार जताता है, तो केवल उस कागज के दम पर बेटी का हिस्सा खत्म नहीं किया जा सकता। अदालत ने दो टूक कहा कि बेटी का अधिकार जन्मसिद्ध है, और उसे किसी संदिग्ध या कमजोर दस्तावेज से खत्म नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक ऐसी वसीयत को पुख्ता सबूतों और गवाहों के जरिए साबित न कर दिया जाए, तब तक प्राकृतिक उत्तराधिकार यानी कानून के हिसाब से बराबर बंटवारा ही लागू रहेगा।

अपंजीकृत वसीयत की कानूनी हैसियत

भारतीय कानून में वसीयत का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं है, यानी सिर्फ इसलिए कि वसीयत रजिस्टर्ड नहीं है, वह अपने आप अवैध नहीं हो जाती। लेकिन प्रैक्टिकल लेवल पर अपंजीकृत वसीयत को कोर्ट में साबित करना कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाता है। अगर बेटी या कोई अन्य उत्तराधिकारी इसे चुनौती दे, तो वसीयत से फायदा उठाने वाले व्यक्ति को ये दिखाना पड़ता है कि–

  • वसीयत सही होश‑हवास में, बिना दबाव के बनाई गई थी।
  • कम से कम दो गवाहों ने सामने रहकर साइन किया और वे कोर्ट में आकर गवाही देने को तैयार हैं।

सरकारी रिकॉर्ड में नाम चढ़वाने (mutation/दाखिल‑खारिज) के समय भी अधिकारी अक्सर या तो पंजीकृत वसीयत, या फिर कोर्ट से मिला probate/सर्टिफिकेट देखने की मांग करते हैं, जिससे अपंजीकृत वसीयत के भरोसे काम और पेचीदा हो जाता है।

बेटियों के अधिकार

हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के बाद से बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर सह‑दायिक माना गया है। सुप्रीम कोर्ट ने Vineeta Sharma जैसे फैसलों में साफ कहा कि बेटी को हक उसके जन्म से मिलता है, न कि इस बात से कि पिता जिंदा हैं या नहीं।

इसका मतलब यह है कि:

  • बेटी शादीशुदा हो या अविवाहित, उसे ancestral property में बराबर हिस्सा मिलेगा।
  • परिवार जब भी बंटवारा करेगा, बेटी को भी उसी तरह हिस्सेदारी देनी होगी जैसे बेटे को।
  • कोई भी संदिग्ध वसीयत, फैमिली सेटलमेंट या मौखिक समझौता उसके इस अधिकार को आसानी से खत्म नहीं कर सकता; उसे साबित करने के लिए मजबूत और साफ सबूत चाहिए।

यूपी में वसीयत रजिस्ट्रेशन की ताज़ा स्थिति

उत्तर प्रदेश में एक समय पर UP Zamindari Abolition and Land Reforms Act की धारा 169(3) के तहत यह स्थिति बन गई थी कि कृषि भूमि की वसीयत के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य माना जा रहा था। इलाहाबाद हाई कोर्ट की फुल बेंच ने मई 2024 के फैसले में साफ कर दिया कि वसीयत के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन वाली यह शर्त भारतीय Registration Act, 1908 के खिलाफ है, क्योंकि मूल कानून वसीयत को ऑप्शनल रजिस्ट्रेशन की कैटेगरी में रखता है।

मतलब यह कि–

  • यूपी में वसीयत का रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं, लेकिन
  • अगर वसीयत अपंजीकृत और संदिग्ध हो, तो कोर्ट उसे आसानी से नहीं मानेगा, खासकर जब उससे बेटियों जैसे वैधानिक वारिसों का हिस्सा खत्म किया जा रहा हो।

2026 के संदर्भ में बेटियों के लिए सीख

2025–26 के कई सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसले मिलकर एक ही दिशा में इशारा करते हैं– “once a daughter, always a daughter”; बेटी का हक सिर्फ शादी या समाज की सोच से खत्म नहीं हो सकता। अगर परिवार में कोई भाई या रिश्तेदार अपंजीकृत वसीयत के आधार पर पूरी पैतृक संपत्ति पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है, तो बेटी के पास मजबूत कानूनी आधार होता है कि:

  • वह वसीयत की सत्यता, गवाहों और हालात पर सवाल उठाए।
  • natural succession के तहत अपना बराबर हिस्सा मांगे।

दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट ने हाल के निर्णयों में महिलाओं को यह भी सलाह दी है कि अपनी self‑acquired property के लिए वे खुद एक clear, properly drafted और बेहतर हो तो registered वसीयत बनाएं, ताकि उनकी मौत के बाद मायका‑ससुराल के बीच बेवजह विवाद न पैदा हो।

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indsocplantationcrops

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