
पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) की खरीद-फरोख्त को लेकर अब नियम पहले जैसे नहीं रहे। यदि आप अपने पूर्वजों की जमीन या घर बेचने की योजना बना रहे हैं, तो सावधान हो जाएं, वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा साझा की गई कानूनी व्याख्याओं ने संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी लेकिन सख्त बना दिया है, बिना कानूनी जानकारी के संपत्ति बेचना अब आपको लंबी अदालती कार्रवाई में फंसा सकता है।
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बंटवारे के बाद बदल जाती है संपत्ति की प्रकृति
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 के एक अहम फैसले (अंगदि चंद्रन्ना बनाम शंकर) में स्पष्ट किया है कि जब एक संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति का कानूनी रूप से बंटवारा हो जाता है, तो वह ‘पैतृक’ नहीं रह जाती। बंटवारे के बाद प्रत्येक वारिस को मिला हिस्सा उसकी ‘स्व-अर्जित’ (Self-Acquired) संपत्ति माना जाता है। ऐसे में मालिक उसे अपनी मर्जी से किसी को भी बेच सकता है और उसे अन्य परिजनों की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
अविभाजित संपत्ति पर ‘पूरी मर्जी’ नहीं चलेगी
अदालत ने यह साफ कर दिया है कि यदि संपत्ति का आधिकारिक बंटवारा (Partition) नहीं हुआ है, तो कोई भी एक वारिस पूरी संपत्ति को अकेला नहीं बेच सकता, हालांकि, 2025 के नए अपडेट के अनुसार, एक वारिस अपना ‘अविभाजित हिस्सा’ (Undivided Share) किसी तीसरे पक्ष को बेच सकता है, लेकिन खरीदार उस संपत्ति पर तब तक भौतिक कब्जा नहीं कर सकता जब तक कि कानूनी रूप से बंटवारा न हो जाए।
बेटियों का हक: अब टालना मुमकिन नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया रुख में दोहराया है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बेटियों का अधिकार बेटों के समान है 2025 में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि किसी पैतृक संपत्ति की बिक्री में बेटियों की लिखित सहमति नहीं ली गई है, तो ऐसी बिक्री को बाद में अवैध घोषित किया जा सकता है, अब यह मायने नहीं रखता कि बेटी की शादी कब हुई या पिता का निधन किस वर्ष हुआ।
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इन 5 बातों का रखें विशेष ध्यान
- परिवार का मुखिया (कर्ता) केवल ‘विशेष परिस्थितियों’ (जैसे कर्ज चुकाने या गंभीर जरूरत) में ही सबकी सहमति के बिना संपत्ति बेच सकता है। इसे साबित करने की जिम्मेदारी कर्ता पर होगी।
- जुलाई 2025 के एक ऐतिहासिक आदेश के बाद, अब अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं को भी पैतृक संपत्ति में पुरुषों के बराबर उत्तराधिकार का हक मिल गया है।
- यदि संपत्ति में किसी नाबालिग का हिस्सा है, तो उसे बेचने के लिए अदालत की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय तक लिव-इन में रहने वाले जोड़ों से पैदा हुए बच्चों का भी पैतृक संपत्ति में कानूनी हक होगा।
- अवैध रूप से बेची गई पैतृक संपत्ति को अन्य वारिस 12 साल के भीतर अदालत में चुनौती दे सकते हैं।
विवाद से कैसे बचें?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी विवाद से बचने के लिए संपत्ति बेचने से पहले एक ‘पारिवारिक समझौता’ (Family Settlement) या ‘पंजीकृत विभाजन विलेख’ (Registered Partition Deed) बनवा लेना सबसे सुरक्षित तरीका है, संपत्ति से जुड़े कानूनी दस्तावेजों और केस स्टेटस की जांच के लिए आप ई-कोर्ट्स की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

















