आज के दौर में EMI पर मोबाइल खरीदना कोई नई बात नहीं रही। लोग आसानी से महंगे स्मार्टफोन घर ला लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि किश्त समय पर न चुकाने पर आपका फोन ही आपको सबक सिखा देगा? जी हां, अब फाइनेंशियल कंपनियां ऐसी चालाकी भरी ट्रिक अपना रही हैं, जहां पेमेंट ड्यू होने पर फोन का वॉलपेपर खुद-ब-खुद बदल जाता है।
स्क्रीन पर बड़ा-सा मैसेज चमकने लगता है – ‘आपकी EMI बकाया है, तुरंत भरो!’ ये देखकर मन डर जाता है और जेब ढीली करने का मन करने लगता है। लेकिन सवाल ये है कि ये सब कैसे होता है और आप इससे कैसे बचें?

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वॉलपेपर रिमाइंडर का जाल कैसे बिछता है?
जब आप दुकान से EMI पर फोन लेते हैं, तो बिक्री के समय ही एक खास ऐप इंस्टॉल कर दिया जाता है। ये ऐप बैकग्राउंड में चुपके से काम करता रहता है। EMI की तारीख नजदीक आते ही ये एक्टिव हो जाता है और होम स्क्रीन को हाईजैक कर लेता है। वॉलपेपर पर चेतावनी वाला इमेज सेट हो जाता है, जो हटाने की हर कोशिश को नाकाम कर देता है। कई बार तो फोन लॉक हो जाता है या नोटिफिकेशन बम की तरह बार-बार आते रहते हैं। ये तरीका लेंडर्स के लिए आसान है, क्योंकि इससे कस्टमर को बिना कोर्ट-कचहरी के घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है। लेकिन ये प्राइवेसी का उल्लंघन भी तो है न?
असल कहानियां जो डराती हैं
कल्पना कीजिए, आपका नया फोन सुबह उठते ही आपको डांटने लगे। एक यूजर ने शेयर किया कि उनकी किश्त ऑटो-डेबिट से कट चुकी थी, लेकिन फिर भी स्क्रीन पर ‘ड्यू अलर्ट’ चिपक गया। घंटों कस्टमर केयर घूमने के बाद ही ऐप हटा। दूसरे केस में तो फोन का कैमरा और गैलरी एक्सेस बंद हो गया। खासकर छोटे फाइनेंशर्स और कुछ बड़े बैंकों के EMI प्लान्स में ये आम हो रहा है। लोग सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे हैं, जहां वॉलपेपर पर लाल रंग में ‘पेमेंट मिस्ड’ लिखा दिखता है। ये न सिर्फ शर्मिंदगी का सबब बनता है, बल्कि दोस्तों-रिश्तेदारों के सामने भी मजाक का पात्र बना देता है।
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बैंक और रेगुलेटर्स की भूमिका
बैंकों का तर्क है कि डिफॉल्ट रेट बढ़ रहा है, इसलिए सख्ती जरूरी है। छोटे-मोटे लोन पर ही लाखों का नुकसान हो रहा है। केंद्रीय बैंक ने पहले ऐसी रिमोट लॉकिंग को सीमित किया था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। नई गाइडलाइंस में खरीदार की सहमति से फोन को ट्रैक या ब्लॉक करने की छूट मिल सकती है। लेकिन सवाल वही है – क्या ये फोन को जासूस बनाने जैसा नहीं? यूजर्स को खरीदते वक्त टर्म्स पढ़ने चाहिए, जहां ये शर्तें छिपी होती हैं। बिना पढ़े साइन करने वाले ज्यादातर लोग फंस जाते हैं।
इससे बचने के आसान तरीके
सबसे पहला उपाय – EMI ऐप को तुरंत अनइंस्टॉल करने की कोशिश करें। अगर न हटे, तो कस्टमर केयर पर कॉल करें और पेमेंट प्रूफ भेजें। दूसरा, ऑटो-डेबिट सेटअप जरूर रखें ताकि भूल न हो। तीसरा, अगर संभव हो तो कैश या डेबिट कार्ड से खरीदें। EMI लेनी ही हो तो कम अवधि वाली चुनें, जहां ब्याज कम लगे। फोन खरीदते वक्त दस्तावेज अच्छे से चेक करें और ऐप की परमिशन न दें। अगर परेशानी हो, तो कंज्यूमर फोरम में शिकायत करें – कई केस ऐसे सुलझ चुके हैं।
भविष्य में क्या उम्मीद करें?
डिजिटल लोनिंग बढ़ने से ये ट्रेंड और तेज होगा। टेक्नोलॉजी के दम पर लेंडर्स कस्टमर को कहीं से भी कंट्रोल कर सकेंगे। लेकिन जागरूक रहें, समय पर पेमेंट करें। वरना आपका स्मार्टफोन दुश्मन बन सकता है! कुल मिलाकर, EMI सुविधा है, बोझ नहीं। स्मार्टली इस्तेमाल करें तो फायदा, लापरवाही से नुकसान।

















