
शैक्षिक सत्र 2026-27 से आरटीई एक्ट में बच्चों के लिए स्कूल चुनने की आजादी बढ़ जाएगी। अब अपने वार्ड में सीट न मिले तो दूसरे वार्ड के प्राइवेट स्कूलों में भी दाखिला हो सकेगा। ये बदलाव गरीब परिवारों के लाखों बच्चों को ज्यादा मौके देगा, खासकर पांचवें चरण में।
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नई नीति का सरप्राइज एलान
दोस्तों, सोचो जरा—पहले तो बच्चे सिर्फ अपने इलाके के स्कूल तक सीमित थे, लेकिन अब ये बंधन ढीला पड़ जाएगा। शिक्षा विभाग ने तय किया है कि अगर वार्ड में 25% आरटीई सीटें भर गईं, तो दूसरे वार्ड के स्कूलों की खाली सीटें भर ली जाएंगी। ये सुविधा खासतौर पर उन फैमिली के लिए वरदान है जहां साल में लाखों बच्चे लाइन में लगते हैं। 1 लाख से कम कमाने वाले आर्य वर्ग के अलावा सभी गरीब घरों के बच्चों को फ्री एजुकेशन का हक मिलेगा।
पांच चरणों वाली पुरानी प्रक्रिया
आवेदन तो पहले की तरह पांच स्टेप्स में होगा। पहले चार चरण अपने वार्ड के स्कूलों के लिए, और आखिरी चरण में अगर जगह न मिले तो पड़ोस के वार्ड देखो। प्राइवेट स्कूलों को 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए रिजर्व रखनी ही पड़ेंगी। ये लॉटरी सिस्टम या मेरिट से भरेगी। माता-पिता को ऑनलाइन पोर्टल पर अप्लाई करना होगा, जहां लोकेशन और डॉक्यूमेंट्स चेक होंगे। पहले कई बच्चे सीट मिस कर देते थे, अब वो समस्या कम होगी।
गरीब बच्चों को मिलने वाले फायदे
भाई, ये बदलाव छोटा लगे लेकिन असर बड़ा होगा। प्राइवेट स्कूलों की बेहतर सुविधा—एसी क्लास, कंप्यूटर लैब, इंग्लिश टीचिंग—अब ज्यादा बच्चों को मिलेगी। खासकर स्लम एरिया या घनी बस्तियों में जहां स्कूल कम हैं, वहां के बच्चे दूसरे वार्ड के अच्छे स्कूल चुन सकेंगे। लड़कियों की पढ़ाई पर खास फोकस रहेगा। सरकार का मकसद है कि कोई बच्चा जगह के चलते शिक्षा से वंचित न रहे।
आवेदन कैसे करें, क्या ध्यान रखें
सबसे पहले आधार कार्ड, इनकम प्रूफ, राशन कार्ड जैसी चीजें तैयार रखो। राज्य के RTE पोर्टल पर रजिस्टर करो, बच्चे की डिटेल्स भरें। पांचवें चरण तक वेट करो अगर जरूरी हो। फीस माफ, यूनिफॉर्म-किताबें फ्री। लेकिन फर्जी डॉक्यूमेंट्स पर सख्ती रहेगी जांच होगी। अभिभावक ग्रुप बनाकर अपडेट शेयर करें। अगर कन्फ्यूजन हो तो हेल्पलाइन या स्कूल प्रिंसिपल से बात कर लो।
भविष्य की उम्मीदें
2026-27 से ये लागू होते ही एडमिशन रेट बढ़ेगा। सरकार डिजिटल सिस्टम को और मजबूत करेगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन चैलेंज ये है कि दूसरे वार्ड के स्कूल वाले मना न करें। अभिभावक जागरूक रहें, बच्चे का भविष्य संवारें। ये स्टेप शिक्षा क्रांति की तरफ बड़ा कदम है।

















