
उत्तर भारत इस वक्त भीषण ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। सर्द हवाएं न केवल जनजीवन को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि स्कूली बच्चों के लिए यह मौसम मुसीबत बनकर सामने आया है। अभिभावक और शिक्षक संगठन लगातार सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि बच्चों को राहत देने के लिए शीतकालीन अवकाश बढ़ाया जाए।
राजस्थान में पहले ही 5 जनवरी तक स्कूल बंद रखने के आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन लगातार गिरते तापमान और बढ़ते कोहरे को देखते हुए अब यह संभावना और प्रबल हो गई है कि राज्य सरकार छुट्टियों में इजाफा कर सकती है।
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जयपुर समेत कई जिलों में घना कोहरा
राजस्थान के जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, अलवर और भरतपुर जैसी जगहों पर सुबह के समय घना कोहरा छाया रहता है। दृश्यता इतनी कम होती है कि सड़कों पर वाहन सरकते हुए आगे बढ़ते हैं। ऐसे में छोटे बच्चों के लिए सुबह-सुबह स्कूल पहुंचना न सिर्फ कठिन बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी जोखिमभरा हो गया है। इसी वजह से जयपुर जिला प्रशासन ने आंगनवाड़ी केंद्रों में 2 जनवरी से 10 जनवरी तक अवकाश घोषित कर दिया है।
अधिकांश जिलों में पारा 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे लुढ़क चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल राहत के आसार नहीं दिख रहे हैं। अगर अगले कुछ दिनों तक तापमान में सुधार नहीं होता, तो सरकार के पास छुट्टियां बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
उत्तर प्रदेश और पंजाब का असर राजस्थान पर
राजस्थान की शिक्षा नीति अक्सर पड़ोसी राज्यों से प्रभावित होती है। उत्तर प्रदेश और पंजाब में हाल ही में स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाए जाने के बाद अब राजस्थान में भी इसी तरह का फैसला आने की उम्मीद की जा रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने नर्सरी से लेकर कक्षा 8वीं तक के सभी स्कूलों को 15 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया है, जबकि कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लिए 5 जनवरी तक अवकाश रखा गया है। दूसरी ओर, पंजाब सरकार ने भी ठंड की तीव्रता को देखते हुए 8 जनवरी तक सभी स्कूलों में छुट्टी बढ़ा दी है। इन दोनों राज्यों के फैसलों के बाद राजस्थान के अभिभावक और शिक्षक संगठन भी समान कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
अभिभावकों की चिंता
राजस्थान के कई हिस्सों से अभिभावकों का कहना है कि सुबह के समय ठंडी हवाएं और कोहरा बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहे हैं। कुछ स्कूलों में तो सुबह सात बजे तक बच्चों को बुलाया जा रहा है, जिससे उन्हें सर्द हवाओं का सामना करना पड़ता है। कई जगहों पर फ्लू, खांसी-जुकाम और बुखार के मामलों में भी तेजी आई है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि ठंड का असर कुछ दिनों तक और जारी रहता है, तो सरकार को तुरंत स्कूल बंद रखने का निर्देश जारी कर देना चाहिए।
सरकार पर दबाव, जल्द आ सकता है फैसला
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पहले ही कह चुके हैं कि शीतकालीन अवकाश का निर्धारण मौसम की स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए। हालांकि शुरू में छुट्टियां तय समय पर ही रखी गईं, लेकिन अब अध्ययन-अध्यापन की तुलना में बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता मानी जा रही है।
शिक्षा विभाग मौसम विभाग की रिपोर्ट पर लगातार नजर बनाए हुए है। सूत्रों के अनुसार, यदि अगले 48 घंटों में तापमान में सुधार नहीं हुआ तो 10 जनवरी या उससे आगे तक छुट्टियां बढ़ाने का आदेश किसी भी समय जारी हो सकता है।
बच्चों की सुरक्षा ही सर्वोपरि
कुल मिलाकर, उत्तर भारत में इस सर्दी ने प्रशासन को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। हर राज्य सरकार चाहती है कि शिक्षा की गति बराबर बनी रहे, लेकिन जब मौसम इतना खराब हो कि बच्चों के लिए बाहर निकलना मुश्किल बन जाए, तो पढ़ाई से ज्यादा जरूरी बन जाती है उनकी सेहत।
अभिभावक इस उम्मीद में हैं कि राज्य सरकार जल्द राहत देने वाला फैसला करेगी, ताकि छोटे बच्चों को ठंड और कोहरे के बीच सुबह-सुबह स्कूल जाने की मजबूरी से मुक्त किया जा सके। राजस्थान में फिलहाल सभी की नजर शिक्षा विभाग के अगली घोषणा पर टिकी है। अगर मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहा, तो छुट्टियां बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।

















