
बरेली जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। शासन स्तर पर कराए गए आधार कार्ड आधारित सत्यापन (Verification) में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। जांच में पाया गया कि 5,684 मृत किसानों (Deceased Farmers) के बैंक खातों में अब तक सम्मान निधि की किस्तें भेजी जाती रहीं। इतना ही नहीं, कई मामलों में मृतक किसानों के पुत्र भी अलग से लाभार्थी बनकर दोहरी रकम (Double Benefit) का लाभ उठाते रहे।
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आधार वेरिफिकेशन से खुली पोल
जिले में कुल 5,45,404 किसान पीएम किसान योजना के तहत पंजीकृत थे। जब शासन स्तर पर आधार कार्ड के माध्यम से जांच की गई, तो 42,662 लाभार्थियों को संदिग्ध मानते हुए उनकी किस्तें रोक दी गईं और कृषि विभाग को फील्ड सत्यापन के निर्देश दिए गए।
इसके बाद उप कृषि निदेशक के निर्देशन में तहसीलवार टीमें गठित कर गहन जांच कराई गई, जिसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आईं।
मृत किसानों के खातों में जाती रही रकम
जांच में सामने आया कि 5,684 ऐसे मामले हैं, जहां किसान की मृत्यु के बाद भी उनके खाते में पीएम किसान सम्मान निधि (₹6,000 प्रति वर्ष) ट्रांसफर होती रही। कई मामलों में वरासत (Inheritance) के बाद पुत्रों ने भी अलग से आवेदन कर दिया और वे भी योजना के लाभार्थी बन गए। इस तरह एक ही परिवार में एक ही जमीन पर दो-दो लाभ लिए जा रहे थे।
अब ऐसे मामलों में शासन ने रिकवरी (Recovery) के आदेश दिए हैं। पहले ही इनकी किस्तें रोक दी गई हैं और अब अवैध रूप से ली गई राशि वापस वसूली जाएगी।
पति-पत्नी दोनों बन गए लाभार्थी
सत्यापन में 12,430 ऐसे मामले भी पाए गए, जहां पति और पत्नी दोनों अलग-अलग किसान बनकर सम्मान निधि प्राप्त कर रहे थे, जबकि नियमों के अनुसार एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति पात्र होता है।
इनमें से 12,193 मामलों का सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 237 नाम पोर्टल पर दर्ज नहीं मिले। अब दोनों की किस्तें रोक दी गई हैं। भविष्य में सिर्फ एक को ही लाभ मिलेगा, लेकिन अब तक ली गई दोहरी रकम की रिकवरी की जाएगी।
यदि पति-पत्नी दोनों ने लगातार दो वर्षों तक निधि प्राप्त की है, तो आगामी दो वर्षों तक किस्त नहीं दी जाएगी।
जमीन खरीद-बिक्री के बाद भी चलता रहा खेल
जांच में यह भी सामने आया कि 6,093 लोगों ने वर्ष 2019 के बाद जमीन खरीदी, लेकिन जमीन के पुराने मालिक और नए खरीदार—दोनों ही उसी भूमि पर पीएम किसान योजना का लाभ ले रहे थे।
इसके अलावा 27,859 ऐसे लाभार्थी पाए गए, जिन्हें वरासत में जमीन मिली थी, लेकिन सम्मान निधि दो अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर हो रही थी।
नाबालिग भी बन गए किसान!
हैरानी की बात यह रही कि 542 नाबालिग (Minor Beneficiaries) भी पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ उठा रहे थे। जबकि नियमों के अनुसार नाबालिग इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं। इन सभी मामलों में भी अब कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
लाभार्थियों की संख्या में भारी कटौती
सत्यापन के बाद बरेली जिले में पीएम किसान सम्मान निधि के पात्र किसानों की संख्या घटकर 5,02,742 रह गई है। यानी करीब 42,662 नाम फर्जी, अपात्र या नियमों के विरुद्ध पाए गए।
उप निदेशक कृषि हिमांशु पांडेय के अनुसार—
“शासन से प्राप्त सूची का सत्यापन पूरा कर लिया गया है। फर्जीवाड़ा करने वालों से रिकवरी की जाएगी। रिकवरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पात्र किसानों को अगली किस्त जारी की जाएगी। सभी पात्र किसानों की Farmer Registry कराई जा रही है।”
सरकार का सख्त रुख, अब नहीं बचेगा फर्जीवाड़ा
सरकार अब PM Kisan Yojana को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए Farmer Registry, Aadhaar Linking, Land Record Digitization जैसे कदमों पर तेजी से काम कर रही है। ठीक उसी तरह जैसे Renewable Energy-Renewable Energy या IPO-IPO सेक्टर में निवेश से पहले सख्त जांच होती है, वैसे ही अब सरकारी योजनाओं में भी पात्रता की कड़ी जांच की जा रही है।

















