
पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिर बढ़ने की आहट सुनाई दे रही है, भाइयों! 1 फरवरी को आने वाले बजट से पहले सरकार 3-4 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी चढ़ा सकती है। तेल कंपनियां मुनाफे में डूब रही हैं, कच्चा तेल सस्ता हो गया है – ऐसे में ये कदम उठाना आसान लग रहा। लेकिन आम आदमी का तो फिर वही हाल!
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बजट से पहले पेट्रोल-डीजल महंगे?
दोस्तों, पेट्रोल पंप पर खड़े होकर जेब ढीली करने का नया बहाना तैयार हो रहा। ब्रोकरेज वालों की मानें तो 1 फरवरी 2026 के केंद्रीय बजट में सरकार पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 3 से 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर सकती है। ये कोई अफवाह नहीं, बल्कि बाजार के जानकारों की भविष्यवाणी है। राजस्व बढ़ाने का ये तरीका सरकार को भाता है, खासकर जब राजकोषीय घाटा कंट्रोल करना हो।
सालाना 50,000 से 70,000 करोड़ का एक्स्ट्रा कमाई हो जाएगी इससे। सोचिए, इतने पैसे से कितने स्कूल-हॉस्पिटल बन सकते हैं, लेकिन फिलहाल तो हमारी गाड़ी का खर्चा बढ़ेगा। अभी दिल्ली में पेट्रोल 94.74 और डीजल 87.62 रुपये लीटर है। मुंबई में तो पेट्रोल 103.54 पहुँच चुका, डीजल 90.03। बेंगलुरु वाले भी 102.92 (पेट्रोल) और 90.99 (डीजल) पर साँस ले रहे। ये कीमतें 11 जनवरी की हैं, रोज चेक करते रहिए IOCL जैसी साइट्स पर।
कंपनियों का मुनाफा क्यों आसमान छू रहा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर 61 डॉलर प्रति बैरल पर आ टिकी है। ये तो अच्छी खबर होनी चाहिए, ना? लेकिन तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) हँसते-हँसते लोटपोट हो रही। उनका ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन (GMM) पहले 3.50 रुपये प्रति लीटर का औसत था, अब 10.60 रुपये तक पहुँच गया। मतलब, सरकार को लग रहा होगा – भई, तुम्हारा इतना मुनाफा है, तो थोड़ा शेयर तो दो!
इसलिए उत्पाद शुल्क बढ़ाना सुरक्षित लग रहा। कीमतें स्थिर रखने की गुंजाइश बनी हुई है, क्योंकि कंपनियों के पास बफर है। जनता पर एकदम से बोझ न पड़े, ये सोचकर ही ये कदम उठाया जा सकता है। लेकिन लंबे समय में हम सब महसूस करेंगे – टैक्सी का किराया बढ़ेगा, ट्रक वाले महंगा माल लाएंगे।
राजस्व से क्या होगा फायदा
सरकार का तर्क साफ है – फिस्कल डेफिसिट कंट्रोल करना जरूरी। ये अतिरिक्त कमाई घाटे को कम करेगी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ेगा। लेकिन हम जैसे आम लोग? रोज की कमाई में से पेट्रोल का हिस्सा बढ़ेगा। किसान ट्रैक्टर चलाएंगे महंगे डीजल पर, दुकानदार सामान महंगा करेंगे। बजट में ये घोषणा हो गई तो सड़कों पर हाहाकार मच सकता है।
पिछले सालों में भी ऐसे ही कदम उठे, लेकिन तब तेल महंगा था। अब सस्ता होने पर भी बढ़ोतरी? ये तो थोड़ा अखरता है। फिर भी, अर्थव्यवस्था के बड़े खेल में हम छोटे प्यादे हैं।
आम उपभोक्ता क्या करें?
भाइयों, घबराओ मत। अभी तो सिर्फ संभावना है। रोज पेट्रोल पंप ऐप चेक करो – IOCL, BPCL वगैरह। फ्यूल एफिशिएंसी वाली गाड़ी यूज करो, कारपूलिंग आजमाओ। इलेक्ट्रिक व्हीकल की तरफ सोचो, भविष्य यही है। बजट आने तक इंतजार करो, शायद सरप्राइज हो। लेकिन तैयारी रखो – जेब थोड़ी टाइट हो जाएगी। क्या लगता है आपको, बढ़ेगी कीमतें या नहीं?

















