
हरियाणा के करनाल जिले के पधाना गांव में करोड़ों रुपये की पंचायती जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त आदेशों का पालन करते हुए राजस्व विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने करीब 86 एकड़ (607 कनाल 12 मरले) जमीन पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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हाईकोर्ट ने दी दो महीने की समयसीमा
न्यायमूर्ति दीपक सिब्बल और न्यायमूर्ति लपिता बनर्जी की खंडपीठ ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए उपायुक्त (DC) करनाल को स्पष्ट निर्देश दिए हैं, अदालत ने आदेश दिया है कि आगामी दो महीने के भीतर इस पूरी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर इसकी नीलामी प्रक्रिया पूरी की जाए।
निशानदेही का काम युद्धस्तर पर जारी
अदालती आदेशों के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया है, राजस्व विभाग की टीम ने गांव पधाना पहुंचकर विवादित भूमि की पैमाइश और निशानदेही का काम शुरू कर दिया है, आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, निशानदेही की प्रक्रिया को अंतिम रुप दे दिया जाएगा, ताकि आगे की बेदखली कार्रवाई की जा सके।
करोड़ों के राजस्व का नुकसान
यह मामला गांव के ही निवासी देशराज और अन्य ग्रामीणों द्वारा दायर याचिका के बाद चर्चा में आया, याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह जमीन कागजों में ‘चरवाहे’ (पशुओं के चरागाह) के लिए आरक्षित थी, लेकिन कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने इस पर अवैध कब्जा कर रखा था, इस कब्जे के कारण ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष लगभग 46 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था।
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प्रशासन की चेतावनी
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निशानदेही की प्रक्रिया पूरी होते ही अवैध ढांचों और कब्जों को हटा दिया जाएगा। इसके तुरंत बाद, पंचायत की आय बढ़ाने के लिए इस जमीन की खुली बोली (नीलामी) आयोजित की जाएगी, प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि कार्यवाही में बाधा डालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि जमीन मुक्त होने से न केवल पंचायत का खजाना भरेगा, बल्कि गांव के विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।

















