
भारतीय रेलवे ने नए साल की शुरुआत के साथ ही बिना टिकट यात्रा करने वालों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाते हुए एक व्यापक अभियान छेड़ दिया है, हालिया आंकड़ों के अनुसार, मध्य रेलवे (Central Railway) और पश्चिम रेलवे (Western Railway) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक जुर्माने के रूप में रिकॉर्ड तोड़ वसूली की है।
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करोड़ों का जुर्माना और लाखों मामले
- मध्य रेलवे (Central Railway): वित्तीय वर्ष 2025-26 (अप्रैल से दिसंबर 2025 तक) में मध्य रेलवे ने 30.75 लाख से अधिक बिना टिकट और अनियमित यात्रियों को पकड़ा है। इनसे कुल 183.16 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 20% अधिक है।
- पश्चिम रेलवे (Western Railway): इसी अवधि में पश्चिम रेलवे ने भी टिकट चेकिंग अभियानों के जरिए 155.46 करोड़ रुपये का जुर्माना एकत्र किया है।
- विभागीय आंकड़े: मध्य रेलवे के भुसावल मंडल ने सबसे अधिक 63.83 करोड़ रुपये और मुंबई मंडल ने 55.12 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला है।
प्रीमियम ट्रेनों पर भी पैनी नजर
रेलवे की सख्ती केवल साधारण ट्रेनों तक सीमित नहीं है, जनवरी 2026 में जम्मू संभाग में वंदे भारत एक्सप्रेस में की गई छापेमारी के दौरान 31 यात्री बिना टिकट पाए गए, जिनसे मौके पर ही 80,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
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जुर्माने के कड़े नियम (2026 के अनुसार)
पकड़े जाने पर यात्रियों को निम्नलिखित वित्तीय और कानूनी दंड का सामना करना पड़ रहा है:
- बिना टिकट यात्रा पर न्यूनतम 250 रुपये का जुर्माना और यात्रा की दूरी का पूरा किराया देय है।
- स्लीपर क्लास के लिए जुर्माना ₹250 + किराया है, जबकि एसी कोच के लिए यह ₹440 + किराया तय किया गया है।
- रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 137 के तहत, गंभीर मामलों या बार-बार उल्लंघन पर 6 महीने तक की कैद या 1000 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी हो सकता है।
तकनीक का सहारा
रेलवे अब टिकट चेकिंग को और प्रभावी बनाने के लिए 30,000 से अधिक हैंड-हेल्ड टर्मिनलों का उपयोग कर रहा है, इसके अलावा, 76 प्रमुख स्टेशनों पर विशेष ‘होल्डिंग एरिया’ बनाए जा रहे हैं ताकि प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के प्रवेश को नियंत्रित कर टिकटों की गहन जांच की जा सके।
भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए यात्री हमेशा IRCTC या UTS मोबाइल ऐप के माध्यम से वैध टिकट लेकर ही यात्रा करें।

















