कानपुर शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों ने अब नगर निगम को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। दो बार बिना वजह इंसानों को काटने वाले कुत्तों को अब शेल्टर होम में आजीवन रखा जाएगा। यह फैसला शहर की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है।

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पहली गलती पर 10 दिन की सजा
शहर में अगर कोई आवारा कुत्ता पहली बार किसी को बिना उकसावे काटता है, तो उसे तुरंत पकड़ लिया जाता है। नगर निगम के एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में 10 दिनों तक निगरानी में रखा जाता है। इस दौरान उसका बंध्याकरण होता है और माइक्रोचिप लगाकर ट्रैकिंग संभव बनाई जाती है।
दूसरी बार काटा तो जिंदगी भर कैद
दूसरी बार वही कुत्ता अगर फिर से हमला करता है, तो उसे शेल्टर होम में ही बंद रखा जाएगा। कानपुर के किशनपुर स्थित सेंटर में अभी 4-5 ऐसे खूंखार कुत्ते मौजूद हैं। इन्हें बाहर छोड़ने का कोई विकल्प नहीं, सिवाय इसके कि कोई जिम्मेदार व्यक्ति गोद ले ले और आजीवन रखने का वादा करे।
कैसे तय होती है कुत्ते की सजा?
हर मामले में तीन सदस्यीय टीम जांच करती है, जिसमें पशु चिकित्सक, व्यवहार विशेषज्ञ और नगर निगम अधिकारी शामिल होते हैं। वे यह फैसला करते हैं कि हमला बिना वजह हुआ या किसी ने कुत्ते को भड़काया। अगर इंसान की गलती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। सेंटर में बंद कुत्तों को अच्छा खाना, इलाज और देखभाल मिलती रहती है।
शहर में कुत्तों का आतंक क्यों बढ़ा?
कानपुर में करीब सवा लाख आवारा कुत्ते घूमते हैं, जिनमें से हजारों ने पिछले साल लोगों को काटा। नगर निगम ने 35 हजार कुत्तों का बंध्याकरण तो किया, लेकिन दोहरावदार हमलों पर अब जीरो टॉलरेंस अपनाया है। 50 कुत्तों की क्षमता वाला नया शेल्टर इसी समस्या से निपटने के लिए तैयार किया गया।
क्या कहते हैं शहरवासी इस फैसले पर?
लोगों को राहत मिली है, क्योंकि रोजाना डॉग बाइट केस बढ़ रहे थे। कुछ इसे क्रूर मानते हैं, लेकिन ज्यादातर इसे जरूरी कदम बता रहे हैं। अब उम्मीद है कि सड़कों पर कुत्तों का खौफ कम होगा और इंसानी जिंदगियां सुरक्षित रहेंगी।

















