भारत का चिकन नेक 150 KM तक चौड़ा होने की चर्चा! क्या बांग्लादेश के रंगपुर डिविजन को कब्जा करेगा भारत?

सोशल मीडिया पर बांग्लादेश के रंगपुर डिविज़न को लेकर नई भू-राजनीतिक अटकलें—जानिए आखिर ये 'चिकन नेक' विवाद क्या है और क्यों सुर्खियों में है भारत।

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बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक उथल-पुथल ने पड़ोसी देश भारत के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। शेख हसीना की सरकार के जाने के बाद सत्ता में आई नई ताकतें भारत-विरोधी बयानबाजी में लगी हैं, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र और सिलिगुड़ी कॉरिडोर को निशाना बना रही हैं। सोशल मीडिया पर रंगपुर डिवीजन को आजाद कराने की बहस तेज हो गई है।

भारत का चिकन नेक 150 KM तक चौड़ा होने की चर्चा! क्या बांग्लादेश के रंगपुर डिविजन को कब्जा करेगा भारत?

बांग्लादेश का नया खतरा

शेख हसीना के हटते ही बांग्लादेश की सत्ता कट्टरपंथी गुटों के प्रभाव में चली गई। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस इन ताकतों के इशारों पर नाच रहे हैं। हर मौके पर भारत को धमकी दी जा रही है, खासकर चिकन नेक कहे जाने वाले सिलिगुड़ी कॉरिडोर को काटने की बातें हो रही हैं। ये ताकतें पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने का सपना देख रही हैं, लेकिन भूल जाती हैं कि बांग्लादेश भारत की गोद में बसा है। 1971 की जंग में भारत ने ही इस देश को आजादी दिलाई थी। अब उलटे धमकियां देना उनकी हताशा दिखाता है।

रंगपुर डिवीजन, रणनीतिक महत्व

रंगपुर डिवीजन बांग्लादेश का उत्तरी हिस्सा है, जो पश्चिम बंगाल से घिरा हुआ है। इसका क्षेत्रफल 16,185 वर्ग किलोमीटर है और आबादी करीब 1.9 करोड़। यहां घनी आबादी है, प्रति वर्ग किलोमीटर 1200 लोग। हिंदू आबादी 13 फीसदी है, यानी 23 लाख लोग। 90 फीसदी सीमा भारत से सटी है। अगर यह डिवीजन आजाद हो जाए, तो सिलिगुड़ी कॉरिडोर 120 से 150 किलोमीटर चौड़ा हो जाएगा। इससे भारत की सुरक्षा मजबूत हो जाएगी। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि अब बहुत हुआ, भारत को राष्ट्रीय हित में कदम उठाना चाहिए।

रूस-यूक्रेन से सबक

रूस-यूक्रेन जंग इसका जीता-जागता उदाहरण है। यूक्रेन ने नाटो से हाथ मिलाया, तो रूस ने अपनी सीमा की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप किया। पश्चिमी देशों ने भी आखिरकार रूस की चिंता मानी। भारत जिम्मेदार देश है, अंतरराष्ट्रीय कानून मानता है। लेकिन अगर पड़ोसी की हरकतें राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालें, तो परोक्ष हस्तक्षेप मजबूरी बन जाता है। बांग्लादेश की अस्थिरता सीधे भारत प्रभावित करेगी।

रंगपुर को आजाद करने का रास्ता

सीधी सैन्य कार्रवाई मुश्किल है। पहले बांग्लादेश के हिंदुओं को रंगपुर में बसना होगा, डेमोग्राफी बदलनी पड़ेगी। एकजुट होकर उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाएं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग राज्य की मांग करें। भारत समर्थन दे सकता है। 1971 में मौका था, अब परिस्थितियां बदल सकती हैं। भौगोलिक स्थिति अनुकूल है। लेकिन भारत पहले शांति चाहेगा।

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