सरकारी आदेश से मची खलबली, LIC के निवेशकों के ₹70,000 करोड़ स्वाहा! जानें क्यों डूब रहा है शेयर?

टैक्स बढ़ते ही शेयर बाजार में मची खलबली, आईटीसी और एलआईसी के निवेशकों की नींद उड़ गई। क्या सरकार का ये फैसला बनेगा वित्तीय विस्फोट? पूरी डिटेल जानें यहां…

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भारत सरकार ने हाल ही में तंबाकू और सिगरेट उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह फैसला स्वास्थ्य सुधार और राजस्व संग्रह में वृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लेकिन इस निर्णय का असर केवल सिगरेट पीने वालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका झटका निवेश बाजार और बीमा क्षेत्र तक पहुंच गया है।

सरकारी आदेश से मची खलबली, LIC के निवेशकों के ₹70,000 करोड़ स्वाहा! जानें क्यों डूब रहा है शेयर?

सिगरेट की कीमतों में बढ़ोत्तरी का असर

एक्साइज ड्यूटी में वृद्धि के कारण सिगरेट की कीमतों में जल्द ही बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा। सरकार ने पहले से लागू 40 प्रतिशत जीएसटी के अतिरिक्त अब एक्साइज ड्यूटी को भी बढ़ाया है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। सिगरेट पीने वाले लोगों को अब हर ब्रांड की कीमत पहले से कहीं अधिक चुकानी पड़ेगी। यह कदम धूम्रपान को हतोत्साहित करने की दिशा में उठाया गया समझा जा रहा है।

आईटीसी के शेयरों में तेजी से गिरावट

सरकार के इस अचानक फैसले के बाद शेयर बाजार में हलचल मच गई। सिगरेट व्यवसाय से सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली कंपनी आईटीसी के स्टॉक्स में भारी बिकवाली देखी गई। निवेशकों ने तेजी से अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए, जिसके चलते दो कारोबारी दिनों के भीतर आईटीसी के शेयरों में लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की वजह से कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग सत्तर हजार करोड़ रुपये तक घट गया।

एलआईसी पर पड़ा तगड़ा असर

आईटीसी के शेयरों की इस गिरावट ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी की स्थिति को भी प्रभावित किया। एलआईसी आईटीसी में सबसे बड़ी हिस्सेदार है और उसके पास लगभग 15.86 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। दिसंबर के अंत तक एलआईसी का निवेश मूल्य लगभग 80 हजार करोड़ रुपये के आसपास था, जो अब घटकर करीब 68.5 हजार करोड़ रुपये रह गया। इस तरह महज दो कारोबारी दिनों में एलआईसी को करीब 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा है।

अन्य बीमा कंपनियों को भी नुकसान

एलआईसी के अलावा अन्य सरकारी बीमा कंपनियों पर भी इस बाजार उतार-चढ़ाव का असर देखने को मिला। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन को करीब 1250 करोड़ रुपये और न्यू इंडिया एश्योरेंस को लगभग एक हजार करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इससे साफ है कि सरकार के टैक्स बढ़ाने के निर्णय का दायरा केवल उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे वित्तीय बाजार को प्रभावित कर गया है।

फैसला सही या गलत

सरकार तंबाकू से होने वाले नुकसान को देखते हुए लगातार उस पर कर का बोझ बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा देना है, लेकिन उद्योग और निवेशकों के लिए यह एक चुनौती की तरह सामने आया है। शेयर बाजार में आई इस गिरावट से लाखों निवेशकों की संपत्ति घट गई है, जबकि सरकार के राजस्व संग्रह में वृद्धि की उम्मीद की जा रही है।

आगे का परिदृश्य

मार्केट विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में आईटीसी जैसे तंबाकू उत्पादकों पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि, लंबे समय में यह कदम सरकार के स्वास्थ्य मिशन को मज़बूत कर सकता है। दूसरी ओर निवेशकों को उम्मीद है कि बाजार स्थिर होने के बाद आईटीसी के शेयरों में धीरे-धीरे सुधार दिख सकता है, जिससे एलआईसी और अन्य बीमा कंपनियां भी अपनी स्थिति संभाल सकेंगी।

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