भारतीय जोड़े अगर विदेश में बस जाएं और तलाक की जंग शुरू हो, तो क्या दूसरे देश का कोर्ट फैसला यहां मान्य होगा? कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला दिया है, जो एनआरआई कपल्स के लिए राहत की सांस ला सकता है। ये बदलाव लाखों परिवारों की जिंदगी पर असर डालेगा।

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केस की शुरुआत कैसे हुई
एक कपल की शादी कोलकाता में 2018 में हुई। पत्नी सालों से ब्रिटेन में नौकरी और पढ़ाई के लिए रह रही थी। दंपति आखिरी बार पति-पत्नी के तौर पर वहीं साथ थे। पति ने 2024 में भारत की निचली अदालत में तलाक की अर्जी डाली। जवाब में पत्नी ने ब्रिटेन की फैमिली कोर्ट में काउंटर केस किया और गुजारा भत्ता मांगा। ब्रिटेन कोर्ट ने पति को भत्ता देने का आदेश दिया, लेकिन भारत की जिला अदालत ने इस पर रोक लगा दी।
निचली अदालत ने क्यों रोका
अलीपुर कोर्ट का कहना था कि पति ने पहले भारत में याचिका दाखिल की, इसलिए विदेशी कोर्ट का कोई अधिकार नहीं। उन्होंने ये भी कहा कि पत्नी ब्रिटेन की परमानेंट रेसिडेंट नहीं है। साथ ही, तय भत्ता राशि पति की इनकम से ज्यादा थी, जो अन्यायपूर्ण लग रही थी। कोर्ट ने पत्नी को विदेश में आगे कार्रवाई रोकने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट का बड़ा कदम
पत्नी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जुप्रतिम भट्टाचार्य की बेंच ने 15 दिसंबर को निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया। उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम की व्यावहारिक व्याख्या की। कोर्ट ने कहा कि जहां दंपति आखिरी बार साथ रहे, उसी जगह की अदालत को सुनवाई का हक है। ब्रिटेन कोर्ट ने पहले ही फैसला सुना लिया और पति ने वहां सबूत पेश किए। ऐसे में भारत की अदालतें शुरुआती स्टेज पर हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं।
कानून की नई व्याख्या
हाईकोर्ट ने साफ किया कि विदेशी कोर्ट का तलाक या मेंटेनेंस ऑर्डर भारत में पूरी तरह अमान्य नहीं होता। अगर एक पक्ष विदेश में रहता है और वहां वैध प्रक्रिया चली, तो फैसला यहां लागू हो सकता है। ये नियम उन मामलों के लिए अहम है, जहां शादी भारत में हुई लेकिन जिंदगी विदेश में बसी। हालांकि, भारतीय कानून से पूरी तरह मेल खाना जरूरी रहेगा।
एनआरआई जोड़ों पर क्या असर
अब कामकाजी पति-पत्नी दोहरी अदालती जंग से बच सकेंगे। गुजारा भत्ता या तलाक के फैसले जल्दी लागू होंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि ये फैसला अन्य हाईकोर्ट्स के पुराने फैसलों से टकराव पैदा कर सकता है। कुल मिलाकर, कानून अब ज्यादा लचीला और प्रैक्टिकल हो गया है। विदेश बसने वाले भारतीयों को सलाह है कि दोनों देशों के नियम पहले समझ लें।

















