दिल्ली में स्कूल एडमिशन के नियमों में बड़ा बदलाव आ गया है। अब 2026-27 सत्र से 5 साल के बच्चों को सीधे पहली कक्षा में दाखिला नहीं मिलेगा। यह कदम बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है, ताकि हर बच्चा सही उम्र में सही स्तर पर पढ़ाई शुरू कर सके।

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नई उम्र सीमाएं क्या हैं?
अब एडमिशन उम्र के सख्त आधार पर होगा। नर्सरी या बालवाटिका-1 के लिए न्यूनतम 3 साल और अधिकतम 4 साल। लोअर केजी के लिए 4 से 5 साल, अपर केजी के लिए 5 से 6 साल। पहली कक्षा में केवल 6 से 7 साल के बच्चे ही प्रवेश ले सकेंगे। 31 मार्च 2026 तक की उम्र गिनी जाएगी, और स्कूल प्रिंसिपल को विशेष मामलों में एक महीने की छूट देने का अधिकार मिला है।
मौजूदा छात्रों पर क्या असर?
जो बच्चे अभी नर्सरी, केजी या पहली कक्षा में पढ़ रहे हैं, उनके लिए कोई बदलाव नहीं। वे पुराने नियमों के मुताबिक ही अगली कक्षा में प्रमोट होंगे। नए एडमिशन वाले ही इन नियमों से बंधे। अगर कोई बच्चा पहले से मान्यता प्राप्त स्कूल से आ रहा है, तो उसे उम्र नियम में छूट मिलेगी, बशर्ते उसके पास सही प्रमाण पत्र हों।
बदलाव का मुख्य उद्देश्य
यह फैसला बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को ध्यान में रखकर लिया गया। छोटी उम्र में औपचारिक पढ़ाई से बच्चे पर दबाव पड़ सकता है, इसलिए फाउंडेशनल स्टेज को मजबूत करने पर जोर। प्रारंभिक कक्षाओं को बालवाटिका के रूप में पुनर्गठित किया गया, जिससे बुनियादी कौशल जैसे पढ़ना, लिखना और गिनती मजबूत हों। इससे भविष्य में पढ़ाई आसान हो जाएगी।
एडमिशन प्रक्रिया के टिप्स
एडमिशन से पहले जन्म प्रमाण पत्र तैयार रखें। आवेदन ऑनलाइन पोर्टल से करें, जो दिसंबर से शुरू हो सकता है। EWS या DG कैटेगरी में भी उम्र नियम लागू। देरी न करें, क्योंकि सीटें सीमित होती हैं। स्कूलों को माता-पिता को पूरी जानकारी देनी होगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। सही क्लास चुनने से बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ेगा।
माता-पिता अभी से योजना बनाएं। गलत क्लास चुनने से बाद में परेशानी हो सकती। यह बदलाव शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में सकारात्मक कदम है।

















