
देश में इन दिनों डायरेक्ट-टू-मोबाइल या D2M तकनीक की खासी चर्चा हो रही है। सोचिए, आपका फोन बिना नेटवर्क के लाइव टीवी चैनल चलाने लगे – न्यूज, क्रिकेट मैच या कोई सीरियल, सब कुछ सीधे हवा में उड़ते सिग्नल्स से। ये सपना अब हकीकत के करीब लग रहा है। सरकारी प्रसारक प्रसार भारती ने इसकी टेस्टिंग कर ली है, लेकिन टेलिकॉम कंपनियां नाराज हैं। आइए, इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं, जैसे दोस्तों के बीच बात हो रही हो।
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D2M क्या बला है, भाई?
D2M को सरल शब्दों में कहें तो ये वो जादू है जो आपके मोबाइल को टीवी का छोटा सा रूप बना देगा। न कोई इंटरनेट, न वाई-फाई, न टेलिकॉम टावरों की मोहताजगी। ये तकनीक ब्रॉडकास्ट सिग्नल्स का इस्तेमाल करती है, जो टीवी टावरों से आते हैं। बस फोन में थोड़ा सा हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर सपोर्ट हो, और आप लाइव चैनल देखने लगें।
सबसे मजेदार बात? ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को इससे फायदा। वहां नेटवर्क की दिक्कत आम है, लेकिन अब मौसम की खबर, सरकारी अलर्ट या आपातकालीन सूचना सीधे फोन पर आ जाएगी। सोचिए, बाढ़ या तूफान के दौरान बिना नेट के लाइफ-सेविंग इंफो मिल जाए। ये तकनीक न सिर्फ मनोरंजन देगी, बल्कि जिंदगी भी बचा सकती है।
कैसे पहुंची ये तकनीक भारत के दरवाजे तक?
ये कहानी 2019 से शुरू होती है। प्रसार भारती ने IIT कानपुर के साथ हाथ मिलाया। मकसद था चेक करना कि D2M से मोबाइल नेटवर्क पर कोई बुरा असर तो नहीं पड़ेगा। साथ ही, फोन ज्यादा गर्म तो नहीं हो जाएगा लाइव स्ट्रीमिंग से? ये समझौता हुआ ताकि सब कुछ सेफ रहे।
कई सालों की मेहनत के बाद टेस्टिंग हो गई। रिपोर्ट आई कि कोई दिक्कत नहीं – न सिग्नल्स में खलल, न फोन में गर्मी। ये खबर सुनकर लगता है जैसे रास्ता साफ हो गया। लेकिन असलियत में मामला अभी उलझा हुआ है, क्योंकि कुछ बड़े खिलाड़ी अंदर ही नहीं थे।
टेस्टिंग की पूरी कहानी
प्रसार भारती ने IIT कानपुर, टेलिकॉम इंजीनियरिंग सेंटर और एराकॉन टेक्नोलॉजी जैसे पार्टनर्स के साथ मिलकर टेस्टिंग की। खास D2M सपोर्ट वाले फोन्स इस्तेमाल किए गए। रिपोर्ट नवंबर 2024 में आई, जिसमें साफ कहा गया – मोबाइल सिग्नल्स पर कोई असर नहीं। फोन नॉर्मल रहेंगे, बैटरी भी ज्यादा न खपेगी।
ये टेस्टिंग उन चिंताओं को दूर करने के लिए थी जो पहले उठी थीं। जैसे, क्या ब्रॉडकास्ट सिग्नल्स टेलिकॉम स्पेक्ट्रम से टकराएंगे? रिपोर्ट कहती है, नहीं। सब कुछ स्मूथ। अब सरकार को लग रहा है कि जल्द ही ये तकनीक लॉन्च हो सकती है, खासकर डिजिटल इंडिया के तहत।
COAI क्यों गरमाया? टेलिकॉम वाली बातें
अब आती है ट्विस्ट। COAI यानी सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, जिसमें जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया जैसी दिग्गज हैं, ने तीखा विरोध जताया। उनका कहना है कि टेस्टिंग में हमें क्यों नहीं बुलाया? बिना टेलिकॉम कंपनियों के कैसे तय हो गया कि सिग्नल्स सेफ हैं?
COAI को शक है कि भविष्य में स्पेक्ट्रम इंटरफेरेंस हो सकता है। मतलब, D2M सिग्नल्स उनके नेटवर्क से भिड़ सकते हैं, जिससे कॉल ड्रॉप या स्पीड कम हो। वो कहते हैं, ये प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी। सबको साथ लेकर चलना चाहिए था। उनकी चिंता जायज लगती है, क्योंकि वो रोज करोड़ों यूजर्स को सर्विस देते हैं।
टेलिकॉम कंपनियों की चिंता
COAI का पॉइंट साफ है – टेस्टिंग एकतरफा हुई। जियो-एयरटेल जैसे प्लेयर्स को बाहर रखा, तो रिपोर्ट पर भरोसा कैसे करें? वो चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जल्दबाजी हुई, तो मोबाइल नेटवर्क पर असर पड़ेगा। खासकर 5G रोलआउट के समय ये रिस्की हो सकता है।
दूसरी तरफ, वो आर्थिक नुकसान की भी बात कर रहे। D2M से लोग इंटरनेट स्ट्रीमिंग कम करेंगे, तो उनका रेवेन्यू घटेगा। OTT प्लेटफॉर्म्स को भी झटका लगेगा। लेकिन सवाल ये है – क्या ग्रामीण यूजर्स के फायदे को नजरअंदाज कर देंगे?
D2M के फायदे
अब पॉजिटिव साइड देखें। भारत में 70 करोड़ से ज्यादा मोबाइल यूजर्स हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। D2M से लाइव टीवी फ्री में मिलेगा। सरकारी स्कीम्स की अपडेट, एजुकेशनल कंटेंट, इमरजेंसी अलर्ट – सब पहुंचेगा।
ये डिजिटल डिवाइड कम करेगा। किसान मौसम की खबर तुरंत पाएंगे, स्टूडेंट्स ऑनलाइन क्लासेस जैसा एक्सपीरियंस लाइव टीवी से। बैंडविड्थ की कोई टेंशन नहीं, तो डेटा कॉस्ट भी बच जाएगी। दुनिया में चीन, कोरिया जैसे देश पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं – भारत क्यों पीछे रहे?
चुनौतियां और भविष्य
फिर भी, रास्ते में रोड़े हैं। फोन्स को D2M सपोर्ट चाहिए, जो अभी ज्यादातर नहीं है। चिपसेट मैन्युफैक्चरर्स को अपग्रेड करना पड़ेगा। रेगुलेटरी अप्रूवल भी जरूरी। TRAI और DoT को COAI की बात सुननी होगी। शायद अगला स्टेप हो, जॉइंट टेस्टिंग। सबको शामिल कर दोबारा चेक। अगर सफल रही, तो 2026 तक लॉन्च हो सकता है। ये न सिर्फ एंटरटेनमेंट बदलेगा, बल्कि सूचना का अधिकार मजबूत करेगा।

















