
साल 2026 में निवेश की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, दशकों से सुरक्षित निवेश का पर्याय माने जाने वाले सोना और चांदी अब पीछे छूटते नजर आ रहे हैं, जबकि ‘तांबा’ (Copper) निवेशकों की पहली पसंद बन गया है, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), रिन्यूएबल एनर्जी और AI डेटा सेंटर्स की वैश्विक होड़ ने तांबे को ‘नया तेल’ (New Oil) बना दिया है।
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कॉपर ईटीएफ (Copper ETFs): बिना किसी झंझट का निवेश
कम जोखिम वाले निवेशकों के लिए Exchange Traded Funds (ETFs) सबसे सुरक्षित विकल्प है। इसमें आपको फिजिकल कॉपर खरीदने या उसे स्टोर करने की जरूरत नहीं होती।
- क्यों चुनें: यह शेयर बाजार में लिस्टेड होता है और सीधे तांबे की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को ट्रैक करता है। इसमें लिक्विडिटी अधिक होती है, यानी आप जब चाहें इसे बेचकर पैसे निकाल सकते हैं, आप Nippon India Mutual Fund जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कमोडिटी आधारित विकल्पों को तलाश सकते हैं।
माइनिंग स्टॉक्स: कंपनियों के मुनाफे में हिस्सेदारी
तांबा उत्पादन और खनन (Mining) करने वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करना कमाई का दूसरा सबसे शानदार तरीका है।
- फायदा: जैसे-जैसे दुनिया भर में तांबे के दाम बढ़ते हैं, इन कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन बढ़ जाता है, जिससे इनके शेयर की कीमतों में उछाल आता है। भारत में Hindustan Copper जैसे सरकारी उपक्रमों और वैश्विक स्तर पर दिग्गज माइनिंग कंपनियों पर नजर रखना फायदेमंद हो सकता है। स्टॉक्स के लाइव अपडेट के लिए Moneycontrol एक विश्वसनीय स्रोत है।
एमसीएक्स फ्यूचर्स (MCX Copper Futures): सक्रिय निवेशकों की पसंद
अगर आप बाजार की चाल को समझते हैं और थोड़ा अधिक एक्टिव रहना चाहते हैं, तो Multi Commodity Exchange (MCX) के जरिए तांबे के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड कर सकते हैं।
- रणनीति: 2026 के लिए मांग के अनुमानों को देखते हुए, निवेशक भविष्य की कीमतों का अनुमान लगाकर पोजीशन बना सकते हैं, इसमें ‘मार्जिन’ की सुविधा मिलती है, जिससे कम पूंजी में बड़ा ट्रेड संभव है, विस्तृत जानकारी के लिए MCX India की वेबसाइट पर लॉग इन करें।
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2026 में तांबा ही क्यों?
विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में तांबे की कीमतों में उछाल के तीन मुख्य कारण हैं:
- EV क्रांति: एक साधारण कार की तुलना में इलेक्ट्रिक कार में 4 गुना अधिक तांबे का उपयोग होता है।
- ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर: सोलर पैनल और विंड टर्बाइन के निर्माण में तांबा अनिवार्य है।
- सप्लाई गैप: नई खदानों की कमी और पुराने माइन्स में उत्पादन घटने से बाजार में तांबे की भारी किल्लत होने की आशंका है।

















