क्या पति बिना बताए पत्नी के गहने या जमीन बेच सकता है? स्त्रीधन पर कोर्ट का अहम फैसला

भारत में पत्नी की नाम वाली संपत्ति पर पति का कोई हक नहीं – बिना मंजूरी बेच ही नहीं सकता! संयुक्त नाम पर दोनों की सहमति जरूरी। पैसे पत्नी के हों, नाम पति का तो DV Act से घर बचाएं। ये कानून महिलाओं को आर्थिक ताकत देते हैं। जागरूक बनें, हक लें!

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क्या पति बिना बताए पत्नी के गहने या जमीन बेच सकता है? स्त्रीधन पर कोर्ट का अहम फैसला

भारत सरकार ने आजादी के बाद से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ढेर सारे कदम उठाए हैं, और इनमें संपत्ति के अधिकार सबसे अहम हैं। ये अधिकार न सिर्फ उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करते हैं, बल्कि परिवार और समाज में उनकी आवाज को भी ताकत देते हैं। आज हम इसी पर खुलकर बात करेंगे – खासकर पति-पत्नी के बीच संपत्ति के झगड़ों पर, ताकि आप अपनी हक की पूरी जानकारी रख सकें।

पत्नी की नाम पर प्रॉपर्टी

सोचिए, आपकी पत्नी के नाम पर कोई प्लॉट या फ्लैट रजिस्टर्ड है। चाहे पैसे पति ने ही दिए हों, या फैमिली ने, लेकिन नाम पत्नी का है तो वो पूरी तरह उसकी मालकिन है। कानून साफ कहता है कि पति बिना उसकी लिखित मंजूरी के इसे बेच नहीं सकता। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन ही असली मालिक तय करता है। अगर पति ने ऐसा करने की कोशिश की तो कोर्ट में केस हो सकता है, और वो डील रद्द हो जाएगी।

बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि शादी के बाद सब कुछ शेयर हो जाता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं। पत्नी अपनी संपत्ति पर पूरी आजादी से फैसला ले सकती है – बेचना हो, किराए पर देना हो या रखना हो। ये स्त्रीधन जैसा ही है, जिस पर पति या ससुराल का कोई दावा नहीं।

संयुक्त नाम वाली संपत्ति का नियम

अब अगर जमीन या घर दोनों पति-पत्नी के नाम पर है, तो मामला थोड़ा अलग। यहां दोनों का बराबर हक है – मतलब 50-50 प्रतिशत। बेचने के लिए दोनों की सहमति और साइन जरूरी। एक तरफ से फैसला नहीं चलेगा। रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट्स में दोनों नाम होने से ये साफ हो जाता है।

ऐसी स्थिति में झगड़ा हो तो कोर्ट दोनों को नोटिस देगा। लेकिन ज्यादातर केस में सहमति से सुलझ जाता है। ये नियम संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए ही बना है।

पैसे पत्नी के, नाम पति का: क्या करें?

कई बार ऐसा होता है – पत्नी कमाती है, बैंक अकाउंट पति संभालता है, प्रॉपर्टी उसके नाम हो जाती। सबूत न होने पर पत्नी परेशान। लेकिन हल है! घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005 (DV Act) के तहत वो उस घर को ‘शेयरड हाउसहोल्ड’ कहलाने का हक पा सकती है।

अगर पति बेचने जाए तो पत्नी मजिस्ट्रेट कोर्ट या हाईकोर्ट में आवेदन दे – कोर्ट बिक्री रोक सकता है, घर से निकालने पर बैन लगा सकता। ये कानून महिलाओं को घर में रहने का अधिकार देता है, भले नाम पति का हो। कई कोर्ट केस में ये कामयाब रहा।

महिलाओं के लिए ये क्यों गेम-चेंजर है?

ये अधिकार महिलाओं को डर से आजाद करते हैं। आज भी गांवों में लड़कियां सोचती हैं कि शादी के बाद प्रॉपर्टी पर हक खत्म। लेकिन हिंदू उत्तराधिकार एक्ट और DV एक्ट ने सब बदल दिया। नाम पर प्रॉपर्टी लो, स्टांप ड्यूटी में भी छूट मिलती। बस, डॉक्यूमेंट्स साफ रखो।​ अगर झगड़ा हो तो वकील से बात करो, या लीगल एड लो। ये जानकारियां आपकी जिंदगी बदल सकती हैं। शेयर करो, ताकि और महिलाएं जागरूक हों!

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indsocplantationcrops

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