Birth Certificate Rule: सावधान! अब बिना SDM की अनुमति के नहीं बनेगा जन्म प्रमाण पत्र, सरकार ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में किया बड़ा बदलाव

सरकार ने जन्म प्रमाण पत्र की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव कर दिया है, अब आवेदन से पहले लेनी होगी एसडीएम की अनुमति, नहीं तो सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा! जानें नया नियम क्या कहता है।

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सरकार ने जन्म प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। खासकर एक साल से ज्यादा पुराने जन्मों के मामले में अब सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट यानी SDM की अनुमति लेना अनिवार्य हो गया है। यह बदलाव फर्जी दस्तावेजों पर लगाम लगाने और सिस्टम को पारदर्शी बनाने के मकसद से लाया गया है। लाखों परिवारों को इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि बिना प्रमाण पत्र के स्कूल एडमिशन से लेकर सरकारी योजनाओं तक हर काम अटक सकता है।

Birth Certificate Rule: सावधान! अब बिना SDM की अनुमति के नहीं बनेगा जन्म प्रमाण पत्र, सरकार ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में किया बड़ा बदलाव

क्यों बदले गए पुराने नियम?

पहले देरी से रजिस्ट्रेशन पर स्थानीय अधिकारी जैसे बीडीओ या सर्कल इंस्पेक्टर की सहमति से काम चल जाता था। लेकिन बढ़ते फर्जीवाड़े और डेटा की गड़बड़ी को देखते हुए केंद्र ने नया कदम उठाया। अब डिजिटल वेरिफिकेशन को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां आधार और अन्य आईडी से मैचिंग जरूरी है। इसका फायदा यह होगा कि देशभर में एकसमान नियम लागू होंगे और जन्म-मृत्यु का सही रिकॉर्ड बनेगा। ग्रामीण इलाकों में पंचायतें और शहरी क्षेत्रों में नगर निगम इसमें सहयोग करेंगे।

नई प्रक्रिया को आसानी से समझें

जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का समय अब तीन चरणों में बंटा है। पहले चरण में, अगर बच्चे का जन्म हुए 21 दिनों के अंदर आवेदन करें तो कोई झंझट नहीं। बस नजदीकी रजिस्ट्रार ऑफिस या ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म भरें। दूसरा, 21 दिन से एक साल तक की देरी पर जिला रजिस्ट्रार की मंजूरी और मामूली शुल्क लगेगा। तीसरा और सबसे सख्त नियम एक साल बाद के लिए है – यहां SDM या डीएम स्तर के अधिकारी से परमिशन लेनी पड़ेगी। आवेदन के साथ हलफनामा, गवाहों के बयान और जन्म के सबूत जमा करने पड़ेंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो रही है, जिससे घर बैठे ट्रैकिंग संभव है।

कौन-कौन से कागजात लगेंगे?

सभी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करने होंगे। यहां मुख्य जरूरतें हैं:

दस्तावेज प्रकारक्या जमा करें
जन्म प्रमाणअस्पताल का डिस्चार्ज स्लिप, आंगनवाड़ी कार्ड या टीकाकरण रिकॉर्ड
अभिभावक आईडीआधार कार्ड, वोटर आईडी या पैन कार्ड कॉपी
गवाह सहारादो स्थानीय लोगों के हलफनामे जन्म तारीख की पुष्टि के लिए
देरी स्पष्टीकरणशपथ-पत्र और पुराने स्कूल रिकॉर्ड अगर लागू हो

ये कागजात न होने पर आवेदन रिजेक्ट हो सकता है। अस्पताली जन्मों के लिए डॉक्टर का सर्टिफिकेट भी जोड़ें।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

यह नियम स्कूल एंट्री, पासपोर्ट आवेदन, राशन कार्ड या पेंशन जैसी सुविधाओं को प्रभावित करेगा। देरी से परेशानी तो बढ़ेगी, लेकिन लंबे समय में फायदा ही होगा। सलाह यही है कि नवजात के अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही प्रक्रिया शुरू कर दें। अगर पुराना केस है तो तुरंत SDM ऑफिस का चक्कर लगाएं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्टेटस चेक करें और फीस ऑनलाइन भरें। सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक 100 फीसदी डिजिटल रजिस्ट्रेशन हो। जागरूक रहें, ताकि छोटी सी देरी बड़ी मुसीबत न बन जाए।

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indsocplantationcrops

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