
बिहार में जमीन से जुड़े विवादों को खत्म करने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने दाखिल-खारिज (Mutation) और जमीन नापी (Land Survey) की प्रक्रिया में आमूलचूल बदलाव किए हैं, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी नए सर्कुलर के अनुसार, अब जमीन की रजिस्ट्री से लेकर रसीद कटने तक की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है।
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‘पहले आओ-पहले पाओ’ (FIFO) सिस्टम लागू
नए नियमों के तहत अब अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज के आवेदनों का निपटारा FIFO (First In, First Out) आधार पर होगा, यानी जो आवेदन पहले आएगा, उसका निष्पादन पहले करना होगा, अब कर्मचारी अपनी मर्जी से फाइलों को ऊपर-नीचे नहीं कर सकेंगे, जिससे बिचौलियों का प्रभाव खत्म होगा।
आवेदन रद्द करने पर देना होगा ठोस कारण
अब अंचल अधिकारी (CO) बिना किसी ठोस आधार के दाखिल-खारिज का आवेदन रद्द नहीं कर पाएंगे, यदि आवेदन खारिज किया जाता है, तो अधिकारी को पोर्टल पर स्पष्ट और सकारण आदेश लिखना होगा, गलत तरीके से आवेदन रद्द करने वाले अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है।
ई-मापी पोर्टल से बुकिंग और डिजिटल नापी
जमीन नापी के लिए अब लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने की जररुत नहीं है, सरकार ने बिहार ई-मापी पोर्टल को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है, अब रैयत घर बैठे सरकारी अमीन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और निर्धारित शुल्क भी ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। 2026 में नापी की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल मैप से जोड़ा जा रहा है।
समय सीमा का कड़ाई से पालन
सरकार ने दाखिल-खारिज के लिए समय सीमा निर्धारित कर दी है:
- सामान्य मामले: 35 कार्य दिवस।
- आपत्ति वाले मामले: अधिकतम 75 कार्य दिवस।
निर्धारित समय के भीतर काम न होने पर संबंधित राजस्व कर्मचारी और अंचल अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
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वंशावली और विरासत दाखिल-खारिज पर जोर
पारिवारिक बंटवारे के विवादों को सुलझाने के लिए ‘विरासत दाखिल-खारिज’ की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, अब पूर्वजों की जमीन को वंशजों के नाम पर चढ़ाने के लिए विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में खरीद-बिक्री में कोई अड़चन न आए।
सरकार के इन नए नियमों से आम जनता को काफी राहत मिलने की उम्मीद है, यदि आप भी अपनी जमीन का रिकॉर्ड चेक करना चाहते हैं या दाखिल-खारिज की स्थिति देखना चाहते हैं, तो बिहार भूमि आधिकारिक पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं।
इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य अदालतों में लंबित जमीन संबंधी मुकदमों को कम करना और आम आदमी को जमीन के कागजातों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना है।

















