
यदि आपके पास एक ही व्यक्ति के नाम पर दो अलग-अलग आधार नंबर वाले कार्ड हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति के लिए एक से अधिक आधार नंबर रखना पूरी तरह से गैर-कानूनी है, ऐसा करना न केवल धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है, बल्कि आपको कानूनी मुसीबत में भी डाल सकता है।
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दो आधार कार्ड रखना क्यों है खतरनाक?
आधार ‘एक व्यक्ति, एक पहचान’ के सिद्धांत पर काम करता है। आधार अधिनियम, 2016 के तहत गलत जानकारी देकर एक से अधिक आधार बनवाना दंडनीय अपराध है:
- सजा और जुर्माना: पकड़े जाने पर आपको 3 साल तक की जेल या 10,000 रुपये तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है।
- सेवाओं पर रोक: फर्जी आधार पाए जाने पर आपका असली आधार भी डी-एक्टिवेट किया जा सकता है, जिससे बैंकिंग और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो जाएगा।
तुरंत करें यह सुधार (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
यदि गलती से आपके दो आधार बन गए हैं, तो कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए नीचे दिए गए कदम उठाएं:
- अपने नजदीकी आधार सेवा केंद्र पर जाएं और फॉर्म-9 भरकर अतिरिक्त आधार नंबर को सरेंडर करने का आवेदन करें।
- यदि आपका आधार 10 साल पुराना है या फोटो साफ नहीं है, तो उसे बदलवा लें। फोटो अपडेट करने के लिए किसी दस्तावेज़ की ज़रूरत नहीं होती; बस आधार केंद्र पर जाकर ₹100 का शुल्क देना होता है।
- UIDAI ने आधार में पता और पहचान के दस्तावेज ऑनलाइन अपडेट करने की अंतिम तिथि 14 जून 2026 तक बढ़ा दी है, इस तारीख तक आप myAadhaar Portal पर मुफ्त में सुधार कर सकते हैं।
2026 के नए नियम: सुरक्षा के लिए बड़े बदलाव
सरकार ने आधार की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए नए नियम लागू किए हैं:
- अब फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरा पहचान) को कानूनी मान्यता दी गई है ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके।
- भविष्य में आधार कार्ड पर नाम और नंबर के बजाय केवल फोटो और एक सुरक्षित QR कोड होगा, जिससे डेटा चोरी का खतरा कम होगा।
किसी भी अनाधिकृत वेबसाइट को अपनी बायोमेट्रिक जानकारी न दें, हमेशा UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।

















