
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में नेशनल और स्टेट हाईवे के किनारे तेजी से हो रहे अनियोजित निर्माण और अवैध प्लॉटिंग पर सख्त कदम उठाया है। अब यदि कोई व्यक्ति हाईवे के आसपास जमीन खरीदकर बिना अनुमति घर या कॉमर्शियल बिल्डिंग बनाता है, तो उसका निर्माण पूरी तरह अवैध माना जाएगा। यह फैसला प्रदेश में संगठित विकास (Planned Development) को बढ़ावा देने और भू-माफियाओं की रोकथाम के मकसद से लिया गया है।
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बिक्री पर प्रतिबंध नहीं, लेकिन अनुमति अब जरूरी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि हाईवे के किनारे जमीन की बिक्री या रजिस्ट्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन अब यह सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) से अनुमति या एनओसी (No Objection Certificate) के बिना संभव नहीं होगी।
इसका मतलब यह है कि कोई भी व्यक्ति यदि जमीन बेचना चाहता है या नई प्लॉटिंग करना चाहता है, तो पहले उसे संबंधित विकास प्राधिकरण, जैसे यूपी हाउसिंग बोर्ड, विकास प्राधिकरण या टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से लेआउट पास कराना होगा।
अवैध कॉलोनियों पर लगेगी लगाम
हाल के वर्षों में हाईवे के किनारे अवैध कॉलोनियों और अनियोजित सोसाइटियों की बाढ़ आ गई थी। इन्हें रोकने के लिए सरकार ने एक “नियंत्रण क्षेत्र (Control Area)” तय किया है।
अब हाईवे से करीब 5 किलोमीटर की परिधि तक, कोई भी नया प्रोजेक्ट चाहे वह रिहायशी हो या व्यावसायिक बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की अनुमति के शुरू नहीं हो सकेगा। इस कदम से उन कॉलोनी डेवलपर्स पर रोक लगेगी जो बिना नक्शा पास कराए जमीन काटकर बेच रहे थे।
कंट्रोल एरिया के अंदर निर्माण नियम
सरकार के बिल्डिंग बायलॉज (Building Bylaws) के तहत हाईवे की चौड़ाई और भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखते हुए सड़क के दोनों ओर एक कंट्रोल एरिया घोषित किया गया है।
इस क्षेत्र में सड़क के मध्य बिंदु से लगभग 75 से 100 मीटर तक किसी भी तरह का पक्का निर्माण (Concrete Structure) करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में जब हाईवे चौड़ा किया जाए, तो भूमि अधिग्रहण और सुरक्षा से जुड़ी दिक्कतें न आएं।
कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव (सेक्शन 143)
कई बार डेवलपर्स कृषि भूमि को बिना “लैंड यूज चेंज” किए सीधे बेच देते हैं। सरकार ने इस पर भी सख्त रुख अपनाया है। अब यदि कोई व्यक्ति कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग (Commercial या Residential) में बेचना चाहता है, तो उसे पहले राजस्व विभाग से भूमि उपयोग परिवर्तन (Section 143) की अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति यदि किसी जमीन की रजिस्ट्री हो जाती है, तो सरकार उसे रद्द (Cancel) कर सकती है।
अवैध निर्माणों पर बुलडोजर की कार्रवाई
नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि जो भी व्यक्ति हाईवे किनारे बिना नक्शा पास कराए निर्माण करेगा, उसका ढांचा सीधा बुलडोजर कार्रवाई के दायरे में आएगा।
साथ ही, ऐसे मामलों में जमीन बेचने वाले और निर्माण करने वाले दोनों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट कहा है कि अब किसी भी प्रकार का “अवैयक्तिक विकास” बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आम नागरिक क्या करें?
अगर आप हाईवे के पास किसी प्लॉट या जमीन में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो ध्यान रखें:
- जमीन की वैधता जांचें – संबंधित प्राधिकरण की वेबसाइट पर जाकर भूमि का रिकॉर्ड और लेआउट वेरिफाई करें।
- एनओसी की पुष्टि करें – विक्रेता से सुनिश्चित करें कि जमीन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा अनुमोदित है।
- मास्टर प्लान देखें – देखें कि जमीन किस ज़ोन (Residential, Agricultural, Commercial) में आती है।
- दलालों से सावधान रहें – बिना रजिस्ट्री व नक्शा पास कराए कॉलोनियां बेचने वाले लोग अब कानूनी कार्रवाई झेल सकते हैं।
क्यों जरूरी था यह निर्णय
उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण हाईवे के दोनों ओर अव्यवस्थित निर्माण, अवैध मार्केट और ट्रैफिक की समस्याएं बढ़ रही थीं। इनसे न केवल सड़क सुरक्षा प्रभावित हो रही थी बल्कि भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार भी मुश्किल हो रहा था।
सरकार के मुताबिक, इस नीति से भविष्य की “स्मार्ट सिटी” और “प्लांड टाउनशिप” की नींव मजबूत होगी। साथ ही, निवेशकों को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी जमीनें कानूनी रूप से सुरक्षित हैं।

















