
पुश्तैनी जमीन के झगड़े भारत में आम हैं, लेकिन अक्सर देखा गया है कि जब मामला कोर्ट में पहुंचता है, तो एक पक्ष फायदा उठाने के लिए चुपके से जमीन किसी तीसरे व्यक्ति को बेच देता है, अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो हाईकोर्ट का ताजा रुख और कानून की धाराएं आपके लिए बड़ी राहत लेकर आई हैं।
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‘लिस पेंडेंस’ का सिद्धांत: कानून की वो ढाल जो आपको बचाएगी
भारतीय कानून के सम्पत्ति हस्तांतरण अधिनियम (Transfer of Property Act) की धारा 52 में ‘लिस पेंडेंस’ (Lis Pendens) यानी ‘विचाराधीन वाद’ का स्पष्ट प्रावधान है। इस नियम के मुताबिक, यदि किसी संपत्ति का मालिकाना हक तय करने के लिए कोर्ट में केस चल रहा है, तो उस दौरान कोई भी पक्षकार उस जमीन को न तो बेच सकता है और न ही ट्रांसफर कर सकता है।
क्या चुपके से की गई रजिस्ट्री रद्द होगी?
हाईकोर्ट के विभिन्न आदेशों के अनुसार, केस के दौरान की गई बिक्री को ‘शून्य’ (Void) माना जा सकता है, अदालत का साफ कहना है कि:
- अगर कोई व्यक्ति केस के दौरान जमीन खरीदता है, तो उसकी रजिस्ट्री कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी। यदि केस बेचने वाला पक्ष हार जाता है, तो खरीदार की रजिस्ट्री अपने आप अवैध हो जाएगी।
- खरीदार यह बहाना नहीं बना सकता कि उसे केस की जानकारी नहीं थी। कोर्ट की नजर में यह खरीदार की जिम्मेदारी है कि वह खरीदने से पहले जमीन के विवादों की जांच करे।
- पीड़ित पक्ष धारा 52 का हवाला देकर कोर्ट से ऐसी रजिस्ट्री को रद्द करने की मांग कर सकता है।
स्टे ऑर्डर और अवमानना का मामला
अगर कोर्ट ने जमीन पर ‘स्टे ऑर्डर’ (Stay Order) या यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया था और उसके बावजूद रिश्तेदारों ने जमीन बेच दी, तो यह न केवल सिविल अपराध है बल्कि ‘कोर्ट की अवमानना’ (Contempt of Court) भी है। ऐसे मामलों में रजिस्ट्री रद्द होने के साथ-साथ बेचने वाले को जेल भी हो सकती है।
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पीड़ित पक्ष को तुरंत क्या करना चाहिए?
अगर आपके रिश्तेदारों ने चोरी-छिपे जमीन बेच दी है, तो विशेषज्ञों की सलाह है:
- तुरंत अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में आवेदन दें और रजिस्ट्री की कॉपी पेश करें।
- तहसील कार्यालय में जाकर म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) रुकवाने के लिए आपत्ति दर्ज कराएं।
- यदि अभी तक स्टे नहीं मिला है, तो फौरन इंजंक्शन (Injunction) के लिए आवेदन करें।
पुश्तैनी जमीन पर कोर्ट का रुख अब बहुत सख्त है। ‘चुपके से बेची गई जमीन’ अब बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों के लिए गले की फांस बन सकती है। अगर आपके पास वैध दस्तावेज हैं और केस विचाराधीन है, तो कानून आपकी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

















