
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के नियमों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है, अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि परिवार में भाई पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है, तब भी मृतक कर्मचारी की आश्रित बहन अनुकंपा नियुक्ति पाने की हकदार होगी।
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क्या है पूरा मामला?
यह फैसला जस्टिस एम.एस. भट्टी की एकल पीठ ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने शासन के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि यदि परिवार का एक सदस्य (बेटा/भाई) सरकारी नौकरी में है, तो दूसरे सदस्य (बेटी/बहन) को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें
- कोर्ट ने कहा कि केवल भाई के नौकरी में होने से बहन की पात्रता खत्म नहीं होती। यदि यह सिद्ध होता है कि मृतक कर्मचारी की बेटी/बहन उन पर पूर्णतः आश्रित थी, तो उसे नियुक्ति दी जानी चाहिए।
- अदालत ने माना कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से उबारना है, ऐसे में भाई और बहन के बीच पात्रता को लेकर भेदभाव करना न्यायसंगत नहीं है।
- इस फैसले से यह भी संदेश गया है कि बेटियों (चाहे वह विवाहित हों या अविवाहित) को अनुकंपा नियुक्ति के मामले में बेटों के समान ही अधिकार प्राप्त हैं।
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क्यों अहम है यह फैसला?
अब तक कई मामलों में प्रशासन द्वारा यह कहकर आवेदन निरस्त कर दिए जाते थे कि मृतक के घर में एक सदस्य पहले से ही सरकारी नौकरी में है, हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब राज्य में अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों में बेटियों और बहनों के लिए रास्ते खुल जाएंगे।
अदालत ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर नियमों के तहत पुनः विचार किया जाए और पात्रता के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए।

















