Solar Train: ट्रेन की बोगियों में AC और पंखे अब सूरज से चलेंगे! बिहार में बिजली कटौती से मिलेगी राहत

बिहार ग्रीन एनर्जी में लीडर! लखीसराय में देश का सबसे बड़ा BESS – 495 MWh सोलर स्टोरेज। दानापुर रेल में ट्रेन छतों पर सोलर पैनल, AC-पंखे सोलर से। बिजली बचत, प्रदूषण खत्म। बिहार आत्मनिर्भर बनेगा!

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Solar Train: ट्रेन की बोगियों में AC और पंखे अब सूरज से चलेंगे! बिहार में बिजली कटौती से मिलेगी राहत

वाह बिहार! ग्रीन एनर्जी के मामले में ये राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। लखीसराय में भारत का सबसे बड़ा बैटरी स्टोरेज सिस्टम बन रहा है, जो सूरज की बिजली को रात तक संभाले रखेगा। ऊपर से दानापुर रेल डिवीजन में ट्रेनों की छत पर सोलर पैनल – पंखे, AC सब सोलर से। पर्यावरण बचाओ, बिजली बचाओ! आइए, इस क्रांति को करीब से देखें, जैसे चाय की टपरी पर गपशप हो रही हो।

बिहार क्यों बन रहा ग्रीन एनर्जी हब?

बिहार में बिजली की दिक्कत पुरानी है, लेकिन अब हरित ऊर्जा से तस्वीर बदल रही। सोलर, बैटरी स्टोरेज – ये प्रोजेक्ट्स न सिर्फ बिजली देंगें, बल्कि पर्यावरण को भी साफ रखेंगे। लखीसराय का BESS प्रोजेक्ट देश का सबसे बड़ा, और रेलवे का सोलर एक्सपेरिमेंट पहला।

ये बदलाव बिजली महंगी होने के डर के बीच आई अच्छी खबर है। राज्य आत्मनिर्भर बनेगा, कटौती कम होगी। सोचो, ग्रामीण इलाके में रात को भी लाइट जलती रहे!

लखीसराय का BESS

लखीसराय के कजरा में जो हो रहा, वो कमाल है। भारत का सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) – 495 मेगावाट घंटे की कैपेसिटी। साथ में 301 मेगावाट सोलर प्लांट। दिन में सूरज से बिजली बनाओ, बैटरी में भर दो, रात में यूज करो।

पहला फेज पूरा – 185 मेगावाट सोलर और 254 MWh स्टोरेज। 1810 करोड़ का निवेश। नई 132 kV लाइन से ग्रिड से जुड़ा। दूसरा फेज 2027 तक – कुल मिलाकर बिहार का ग्रिड सुपर स्ट्रॉन्ग हो जाएगा।

ट्रेनों पर सोलर पैनल

अब रेलवे की बात। दानापुर डिवीजन में ट्रेनों की छत पर फ्लेक्सिबल सोलर पैनल लगने वाले हैं। पहले कैंप कोच पर ट्रायल – वो बोगियां जो मेंटेनेंस के लिए यूज होती हैं। हर कोच से 40-50 यूनिट बिजली, सालाना डेढ़ लाख की सेविंग। पंखे, लाइट्स, फोन चार्जिंग – सब सोलर से। फिर MEMU ट्रेनें, इंटरसिटी। पूर्व मध्य रेलवे का पहला डिवीजन, बाकी जोन में फैलेगा। जनरेटर का धुआं-शोर खत्म, जगह पर एक्स्ट्रा कोच!

पर्यावरण और बिजली बचत के जबरदस्त फायदे

सोलर ट्रेनों से डीजल बचत, प्रदूषण जीरो। पावर कार हटेगी, यात्री कैपेसिटी बढ़ेगी। BESS से ग्रिड स्टेबल – पीक आवर्स में ब्लैकआउट नहीं। बिहार में बिजली रेट 35 पैसे बढ़ने का प्रपोजल है, लेकिन ये प्रोजेक्ट्स बिल कम रखेंगे। पर्यावरण को फायदा – कोयला कम, कार्बन कम। किसान, फैक्ट्री, घर – सबको सस्ती ग्रीन बिजली। बिहार अब रिन्यूएबल में लीडर!

BESS कैसे काम करेगा? आसान भाषा में

दिन में सोलर पैनल बिजली बनाते हैं। ज्यादा बनी तो बैटरी चार्ज। शाम को डिमांड बढ़ी – बैटरी डिस्चार्ज। 4-5 घंटे तक सप्लाई। ग्रिड पर लोड कम, कटौती खत्म। पहले फेज में ही आसपास के गांवों को फायदा। 2027 तक फुल कैपेसिटी – बिहार बिजली एक्सपोर्ट भी कर सकेगा। क्या कमाल है न?

सोलर ट्रेनों का ट्रायल: क्या उम्मीदें?

दानापुर से शुरू, पटना जंक्शन वाली ट्रेनें पहले। फ्लेक्सिबल पैनल – हल्के, आसानी से लगें। सफल हुआ तो AC कोच तक। प्रति कोच डेढ़ लाख सेविंग – लाखों ट्रेनों में गुणा-भाग करो तो अरबों बचत। रेलवे ग्रीन बन रहा। शोर-धुआं मुक्त यात्रा, ज्यादा सीटें। पैसेंजर्स खुश, पर्यावरण खुश!

चुनौतियां क्या हैं, भविष्य क्या?

मौसम पर डिपेंडेंसी, मेंटेनेंस – लेकिन बैटरी स्टोरेज हल करेगा। इनवेस्टमेंट बड़ा, लेकिन ROI शानदार। बिहार सरकार की योजना – घर-घर ग्रीन बिजली। बिजली कंपनियों का रेट हाइक प्रपोजल रुकेगा। अन्य राज्य देखें तो बिहार लीडर बनेगा। जॉब्स क्रिएट, इकोनॉमी बूस्ट। ये प्रोजेक्ट्स बिहार को चमकाएंगे। सोलर ट्रेनें दौड़ेंगी, बैटरी बिजली बांटेगी। बिजली सस्ती, साफ, लगातार। गर्व हो रहा न? बिहार आगे बढ़ रहा!

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indsocplantationcrops

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