सावधान! फोन पर पुलिस बनकर न आएं तो न डरें, डिजिटल अरेस्ट के बहाने लाखों की लूट हो रही है। ये साइबर ठगों का नया हथकंडा है जो लोगों को वीडियो कॉल पर घंटों बांधे रखकर उनकी जमा पूंजी उड़ा लेते हैं। आज हम बताते हैं ये जाल कैसे बिछता है और इससे कैसे बचा जाए।

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डिजिटल अरेस्ट का पूरा खेल
ठग पहले व्हाट्सएप या अनजान नंबर से कॉल करते हैं। खुद को सीबीआई, ईडी या नारकोटिक्स विभाग का अफसर बताते हैं। कहते हैं आपके नाम पर ड्रग्स वाला पार्सल पकड़ा गया या मनी लॉन्ड्रिंग का केस है। वीडियो कॉल पर फर्जी आईडी या दस्तावेज दिखाकर डराते हैं। फिर कहते हैं जांच के नाम पर घर से बाहर न निकलें, बस वीडियो ऑन रखें। घंटों या दिनों तक ब्लैकमेल करते हुए बैंक डिटेल्स, ओटीपी मांगते हैं।
असली कहानियां जो चौंकाएंगी
मुंबई की एक बुजुर्ग महिला को 30 दिन तक वीडियो पर कैद रखकर करीब 4 करोड़ रुपये लूट लिए गए। लखनऊ में एक डॉक्टर को सात दिनों की डिजिटल कैद में 2.8 करोड़ गंवाने पड़े। दिल्ली का एक रिटायर्ड इंजीनियर तब जाकर बचा जब ठगों ने उसके बच्चों से और पैसे मांगे। ऐसे हजारों मामले रोज सामने आ रहे हैं। ठग मध्यमवर्गीय परिवारों को निशाना बनाते हैं जो थोड़ी सी गलती पर घबरा जाते हैं।
खुद को कैसे बचाएं
सबसे पहला नियम, कोई पुलिस फोन पर अरेस्ट नहीं कर सकती। असली जांच के लिए लिखित नोटिस आता है। संदिग्ध कॉल काटकर खुद आधिकारिक नंबर पर कॉल करें। कभी ओटीपी, पिन या बैंक जानकारी न दें। तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। फोन रीसेट करें, बैंक को बताएं। परिवार वालों को भी सतर्क रखें।
ये क्यों बढ़ रहा है खतरा
साइबर ठग विदेशों से कॉल करते हैं, फर्जी वर्दी और बैकग्राउंड यूज करते हैं। लोग डर के मारे चुप रहते हैं। लेकिन अब सरकार सख्त हो रही है। जागरूकता फैलाएं, क्योंकि एक छोटी सी सतर्कता आपकी कमाई बचा सकती है। फोन आए तो सांस लें, सोचें और रिपोर्ट करें। सुरक्षित रहें!

















