
मध्यप्रदेश की महत्वाकांक्षी अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को इस परियोजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक सड़क न रहे, बल्कि चंबल के पिछड़े इलाकों को देश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक मार्गों से जोड़े।
अटल प्रोग्रेस-वे का सबसे बड़ा असर मध्यप्रदेश के तीन जिलों मुरैना, भिंड और श्योपुर पर देखने को मिलेगा। यह एक्सप्रेसवे राजस्थान के कोटा जिले के सीमाल्या गाँव के पास से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के निनावा तक जाएगा। लगभग 404 किलोमीटर लंबी यह सड़क भारतमाला परियोजना के तहत बनाई जा रही है, जिसमें मप्र के हिस्से में 313.81 किमी, राजस्थान में 72 किमी, और यूपी में 22.96 किमी का मार्ग शामिल है।
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यात्रा का समय घटेगा, कनेक्टिविटी बढ़ेगी
अब तक चंबल क्षेत्र से कोटा या इटावा की यात्रा करने वालों को लंबा और थकाऊ सफर करना पड़ता है। मौजूदा सड़कों के कारण यात्रा में 10 से 11 घंटे का समय लग जाता है, लेकिन अटल प्रोग्रेस-वे तैयार होने के बाद यह दूरी मात्र 6 घंटे में तय की जा सकेगी। यानी पूरे 5 घंटे की बचत, जो इस इलाके में व्यापार, उद्योग और पर्यटन के लिहाज से बड़ी बात है।
यह मार्ग सीधे दिल्ली–वडोदरा एक्सप्रेसवे और आगरा–लखनऊ हाईवे से जुड़ जाएगा। ऐसे में मुरैना, श्योपुर और भिंड जिले न सिर्फ राजस्थान और उत्तर प्रदेश से तेजी से जुड़ेंगे, बल्कि मुंबई, कोटा, कानपुर, लखनऊ और आगरा जैसे शहरों के लिए भी एक तेज़, सुरक्षित और छोटा रास्ता उपलब्ध होगा।
किसानों के लिए नई उम्मीद या नई चुनौती?
इस परियोजना के सबसे संवेदनशील पहलू में भूमि अधिग्रहण भी शामिल है। अटल प्रोग्रेस-वे के लिए श्योपुर जिले में लगभग 598 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी है, जिसमें 507 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है। यही कारण है कि कई किसानों ने पहले इसका विरोध किया था, क्योंकि प्रारंभिक एलाइनमेंट खेतों से होकर गुजर रहा था।
विरोध के बाद मार्च 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने घोषणा की थी कि सड़क अब खेतों की बजाय बीहड़ों से होकर बनाई जाएगी। मगर इस घोषणा के बाद कार्यवाही रुकी हुई थी। अब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि किसानों और स्थानीय निवासियों की सहमति से ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए, ताकि विकास और जनता दोनों का संतुलन बना रहे।
बढ़ती लागत, बढ़ती उम्मीदें
अटल प्रोग्रेस-वे की प्रारंभिक लागत करीब 6,000 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन अब यह राशि बढ़कर 23,645 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह अंतर साफ दिखाता है कि योजना में देरी कितनी महंगी साबित हो रही है। हालांकि, अगर यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो इसका सीधा आर्थिक लाभ स्थानीय व्यवसायों, परिवहन सेवाओं, तथा पर्यटन को मिलेगा।
मुरैना से लेकर भिंड और श्योपुर तक के इलाकों में छोटे उद्योग, कृषि आधारित व्यवसाय और लॉजिस्टिक क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी। सड़क बनने से चंबल के बीहड़ों वाला इलाका अब “अविकसित” नहीं, बल्कि “संभावनाओं वाला” क्षेत्र बन सकता है।
प्रगति के दो प्लान, एक मंज़िल
मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में अधिकारियों ने अटल एक्सप्रेस-वे के दो वैकल्पिक प्लान का तुलनात्मक प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह मौजूद थे। सीएम ने स्पष्ट कहा कि परियोजना में किसी भी तरह की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
योजना का मकसद सिर्फ सड़क निर्माण नहीं, बल्कि चंबल क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार, पर्यटन और निवेश का रास्ता खोलना है। सड़क बनते ही इस इलाके को देश की व्यावसायिक राजधानी मुंबई से लेकर राजधानी दिल्ली तक सीधा एक्सेस मिलेगा जो किसी भी क्षेत्र के लिए विकास का सबसे बड़ा संकेत है।

















