Home Rent Law Update: मकान मालिक और किराएदारों के लिए 2 नए नियम लागू, डिपॉजिट और एग्रीमेंट में 5 बड़े बदलाव

नए किराया कानूनों ने मकान मालिक और किराएदार के रिश्ते की परिभाषा बदल दी है, अब डिपॉजिट सीमित, रजिस्ट्रेशन डिजिटल और झगड़े होंगे खत्म! जानिए कौन-सा नियम आपके लिए सबसे फायदेमंद है।

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2025 में सरकार ने किराया कानूनों को नया रूप दिया है ताकि किराएदारी प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन लाया जा सके। अब किराएदारों और मकान मालिकों दोनों के अधिकार स्पष्ट रूप से तय किए गए हैं जिससे विवादों में काफी कमी आने की उम्मीद है।

Home Rent Law Update: मकान मालिक और किराएदारों के लिए 2 नए नियम लागू, डिपॉजिट और एग्रीमेंट में 5 बड़े बदलाव

हर रेंट एग्रीमेंट का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

अब हर किरायेदारी समझौते को साइन होने के 60 दिनों के भीतर ऑनलाइन रजिस्टर कराना जरूरी है। राज्य सरकारों ने इसके लिए अपने पोर्टल पर ई-स्टैंपिंग और डिजिटल साइन की सुविधा शुरू की है। यह प्रक्रिया न केवल सुरक्षित है बल्कि इससे धोखाधड़ी और दस्तावेजों के खोने का खतरा भी समाप्त हो गया है। बिना रजिस्ट्रेशन के एग्रीमेंट पर कम से कम ₹5,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है।

सिक्योरिटी डिपॉजिट पर तय सीमा

पहले बड़े शहरों में मकान मालिक छह से दस महीने का एडवांस किराया मांगते थे जिससे किराएदारों पर ज्यादा बोझ पड़ता था। अब नए कानून के अनुसार रिहायशी मकानों के लिए अधिकतम दो महीने और कॉमर्शियल जगहों के लिए छह महीने का डिपॉजिट ही लिया जा सकेगा। इस कदम से छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को राहत मिली है।

पुराने नियम बनाम नए नियम

विषयपुराने नियमनए नियम 2025
डिपॉजिट सीमा6-10 महीने का किराया2 महीने का किराया
रजिस्ट्रेशनवैकल्पिक60 दिन में अनिवार्य ऑनलाइन
किराया बढ़ोतरीबिना नियमानुसारसाल में एक बार, 90 दिन का नोटिस

किराएदारों के अधिकार हुए मजबूत

अब मकान मालिक किराएदार के घर में प्रवेश करने से पहले कम से कम 24 घंटे का नोटिस देंगे और यह सिर्फ दिन के समय ही हो सकेगा। बड़े मरम्मत कार्य जैसे पाइप या वायरिंग को ठीक करवाना मकान मालिक की जिम्मेदारी होगी जबकि छोटे-मोटे काम किराएदार को संभालने होंगे। बेदखली केवल किराया न देने या संपत्ति के दुरुपयोग जैसी स्थितियों में ही संभव होगी।

मकान मालिकों को भी मिला फायदा

कानून में मकान मालिकों के लिए भी कई सुधार किए गए हैं। जिन मकानों का किराया ₹5,000 से अधिक है उनके लेनदेन अब सिर्फ डिजिटल माध्यमों जैसे यूपीआई या बैंक ट्रांसफर से ही किए जा सकेंगे। इसका फायदा यह होगा कि हर भुगतान का सुरक्षित रिकॉर्ड रहेगा और विवादों में सबूत की कमी नहीं होगी। किसी झगड़े की स्थिति में मामला रेंट ट्रिब्यूनल में जाएगा जहां 60 दिनों के भीतर निपटारा किया जाएगा।

किराया बढ़ोतरी के नए नियम

अब किराया बढ़ाने के लिए साल में एक बार ही अनुमति होगी और इसके लिए मकान मालिक को किराएदार को 90 दिन पहले सूचित करना होगा। यह प्रावधान पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने में मदद करेगा।

करें ये जरूरी काम

  • पुराना एग्रीमेंट देखें और आवश्यकता हो तो नया डिजिटल एग्रीमेंट बनवाएं।
  • अपने राज्य की आवास वेबसाइट पर जाकर स्थानीय नियमों की जानकारी लें।
  • किसी भी बदलाव या संदेह के लिए कानूनी सलाह लेना बेहतर रहेगा।
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indsocplantationcrops

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