
आजकल तो घर-घर में प्रॉपर्टी के झगड़े चल रहे हैं ना? सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो पिता की वसीयत को लेकर बेटियों के हक पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अगर पिता ने अपनी संपत्ति पर साफ-सुथरी वसीयत बनाई और इंटर-कास्ट मैरिज जैसी वजह से बेटी को बाहर कर दिया, तो कोर्ट उसमें दखल नहीं देगा। टेस्टेटर की आखिरी इच्छा ही बॉस है, बशर्ते वसीयत लीगल तरीके से वैलिड हो। ये बात सुनकर कई लोग चौंक गए हैं, खासकर जब 2005 के बाद बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का हक मिला है। लेकिन twist ये है कि वसीयत के आगे वो हक पीछे हट जाता है।
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कोर्ट का ताजा फैसला क्या कह रहा है?
सुप्रीम कोर्ट ने शैला जोसेफ वाले केस में साफ कहा कि पिता ने अपनी बेटी को कम्युनिटी से बाहर शादी करने पर वसीयत से हटा दिया था, और ये पूरी तरह वैध है। लोअर कोर्ट्स ने तो वसीयत को खारिज करने की कोशिश की, लेकिन टॉप कोर्ट ने बोला – हम टेस्टेटर की जगह पर सहानुभूति या समानता थोप नहीं सकते। वसीयत 1988 की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे आज भी मान्य ठहराया। बेटी का पार्टिशन क्लेम सीधे रिजेक्ट। ये फैसला वसीयत संबंधी स्वतंत्रता को मजबूत करता है, मतलब पिता को अपनी self-acquired प्रॉपर्टी पर फुल कंट्रोल।
पिता की वसीयत कितनी पावरफुल?
भाई, सोचो तो सही – पिता को अपनी संपत्ति बांटने का पूरा हक है। वो वसीयत लिखकर किसी को भी बाहर कर सकता है, चाहे वो सबसे प्यारी बेटी ही क्यों न हो। कोर्ट ने कहा कि बराबरी का सिद्धांत यहां अप्लाई नहीं होता। अगर वसीयत सही से लिखी गई, दो गवाहों के साथ साइन हुई और कोर्ट में प्रूव हो गई, तो कोई हस्तक्षेप नहीं। इंटर-कास्ट मैरिज जैसी पर्सनल वजह से बाहर करना गलत नहीं। बस, fraud या undue influence जैसी कोई गड़बड़ी न हो। ये स्वतंत्रता इंडियन Succession Act की बुनियाद है।
2005 का कानून और बेटी का हक
2005 के हिंदू उत्तराधिकार संशोधन ने तो कमाल कर दिया बेटियां जन्म से हमवारिस बन गईं, पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर शेयर। चाहे पिता पहले मरे हों या बाद में, हक वैसा ही। लेकिन here’s the catch: ये intestate case (बिना वसीयत) के लिए है। Valid will होने पर टेस्टेटर की इच्छा supreme हो जाती है। कोर्ट ने क्लियर किया कि बेटी का coparcenary right वसीयत के सामने झुकता है। पैतृक vs self-acquired का फर्क समझो पैतृक में हक fixed, लेकिन पिता की कमाई हुई प्रॉपर्टी पर वो राजा।
वसीयत को कब चैलेंज करोगे?
अब बेटी सोचेगी, तो क्या करूं? सिर्फ हिस्सा न मिलने से वसीयत नहीं टूटेगी। प्रमाण दो करो टेस्टेटर sound mind में नहीं था, या coercion हुआ। गवाहों की स्टोरी में छोटे गैप्स नार्मल हैं, लेकिन suspicious circumstances साबित होने चाहिए। इस केस में कोर्ट ने sole witness को भी credible माना। अगर सब क्लीन है, तो बेटी को natural succession का इंतजार – लेकिन वसीयत के आगे zero chance। लॉयर से चेक कराओ, पब्लिक नोटिस से कुछ नहीं होता।

















