
2025 में ऊर्जा क्षेत्र को घाटे से उबारने और ईमानदार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने बिजली चोरों के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ दी है, केंद्र और राज्य सरकारों के साझा प्रयासों के तहत अब बिजली चोरी करने वालों के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लागू कर दिए गए हैं, अब कटिया डालने या मीटर से छेड़छाड़ करने वालों को न केवल आर्थिक दंड झेलना होगा, बल्कि उनके लिए जेल का रास्ता भी साफ हो गया है।
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स्मार्ट मीटर और AI से होगी निगरानी
सरकार ने तकनीक को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है, देशभर में स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाने के अभियान में तेजी लाई गई है। इन मीटरों की खासियत यह है कि इनके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होते ही विभाग के सर्वर पर तुरंत ‘अलर्ट’ जेनरेट हो जाता है, इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए उन इलाकों की पहचान की जा रही है जहाँ बिजली का ‘लाइन लॉस’ ज्यादा है।
कड़े कानून और भारी जुर्माना
बिजली अधिनियम की धारा 135 के तहत बिजली चोरी को एक गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार:
- आर्थिक दंड: पकड़े जाने पर चोरी की गई बिजली की कुल अनुमानित लागत का 3 गुना तक जुर्माना वसूला जाएगा।
- जेल की सजा: दोषी पाए जाने पर आरोपी को 3 साल तक के कारावास की सजा हो सकती है।
- विशेष पुलिस स्टेशन: बिजली चोरी के मामलों की त्वरित सुनवाई और कार्रवाई के लिए विशेष ‘एंटी-थेफ्ट पुलिस स्टेशन’ को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है।
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संपत्ति कुर्क करने की तैयारी
सिर्फ जुर्माना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति बिजली चोरी के दंड का भुगतान करने में विफल रहता है, तो विभाग को उसकी संपत्ति कुर्क (Seize) करने के अधिकार भी दिए गए हैं। बार-बार अपराध करने वालों के बिजली कनेक्शन स्थायी रूप से काटने के निर्देश दिए गए हैं।
आम जनता से अपील
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिजली चोरी को रोकने में मदद करें, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी टोल-फ्री नंबर 1912 पर दी जा सकती है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
सरकार का यह कड़ा रुख साफ संदेश देता है कि अब मुफ़्त की बिजली के लिए अवैध तरीकों का इस्तेमाल महंगा पड़ने वाला है बिजली चोरी न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और ईमानदार करदाताओं पर भी बोझ बढ़ाती है।

















