भारत में महिला सशक्तिकरण अब केवल नीतियों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकारों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजनाओं को बड़े पैमाने पर लागू किया है। इन योजनाओं के तहत महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने या तय अंतराल पर सीधी राशि भेजी जाती है, जिससे वे घरेलू जरूरतों, स्वास्थ्य, पोषण और बच्चों की शिक्षा पर खुद निर्णय ले सकें।

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कितने राज्यों में मिल रही है महिलाओं को नकद सहायता
मौजूदा समय में देश के लगभग 15 राज्यों में महिलाओं के लिए अलग-अलग कैश स्कीम्स लागू हैं। इन सभी योजनाओं पर सालाना अनुमानित खर्च करीब 2.46 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। अधिकतर योजनाएं उन महिलाओं को लक्षित करती हैं जो आयकर दाता नहीं हैं, सरकारी नौकरी में नहीं हैं और आर्थिक रूप से कमजोर या निम्न-मध्यम वर्ग से आती हैं। सरकारों का मानना है कि महिलाओं को सीधे पैसा देने से उसका उपयोग ज्यादा जिम्मेदारी और जरूरत के हिसाब से होता है।
झारखंड: सबसे ज्यादा मासिक कैश देने वाला राज्य
महिलाओं को सबसे अधिक मासिक नकद सहायता देने में Jharkhand इस समय सबसे आगे है। यहां मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना के तहत 18 से 50 वर्ष की पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये दिए जा रहे हैं। हालांकि इस योजना का लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलता है जो न तो आयकर देती हैं और न ही सरकारी कर्मचारी परिवार से जुड़ी होती हैं। इतनी बड़ी मासिक राशि के कारण यह योजना देशभर में सबसे ज्यादा चर्चा में रही है।
कर्नाटक की गृह लक्ष्मी योजना
दक्षिण भारत में Karnataka की गृह लक्ष्मी योजना को महिलाओं के लिए एक मजबूत सहारा माना जा रहा है। इस योजना के तहत परिवार की महिला मुखिया को हर महीने 2000 रुपये दिए जाते हैं। पात्रता इस बात पर निर्भर करती है कि महिला या उसका पति आयकर या जीएसटी का भुगतान करता है या नहीं। इस योजना का उद्देश्य घरेलू खर्चों में महिलाओं की भूमिका को और मजबूत करना है।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की प्रमुख योजनाएं
Maharashtra में मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये मिलते हैं, बशर्ते परिवार की सालाना आय ढाई लाख रुपये से कम हो। वहीं Madhya Pradesh की लाड़ली बहना योजना में दिसंबर 2025 से मासिक सहायता बढ़ाकर 1500 रुपये कर दी गई है। राज्य सरकार भविष्य में इस राशि को 5000 रुपये तक बढ़ाने के संकेत भी दे चुकी है।
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की योजनाएं
कुछ राज्य अपेक्षाकृत कम राशि देते हैं, लेकिन वहां लाभार्थियों की संख्या काफी अधिक है। Tamil Nadu में कलैग्नार मगलिर उरीमाई थोगाई योजना के तहत महिला मुखियाओं को हर महीने 1000 रुपये दिए जाते हैं। इसी तरह West Bengal की लक्ष्मी भंडार योजना में सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपये और अनुसूचित जाति व जनजाति की महिलाओं को 1200 रुपये प्रति माह मिलते हैं।
पूर्वोत्तर और अन्य राज्यों की कैश स्कीम्स
Assam में ओरुनोडोई योजना के तहत कम आय वाले परिवारों की महिलाओं को हर महीने 1250 रुपये दिए जाते हैं। Chhattisgarh में महतारी वंदन योजना के जरिए 21 से 60 वर्ष की शादीशुदा महिलाओं को 1000 रुपये प्रति माह मिलते हैं। वहीं Odisha की सुभद्रा योजना में पांच वर्षों में कुल 50 हजार रुपये दिए जाते हैं, जो औसतन करीब 833 रुपये प्रति माह के बराबर है।
दिल्ली और हिमाचल प्रदेश की योजनाएं
राष्ट्रीय राजधानी Delhi में मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना के तहत 1000 रुपये प्रति माह देने की घोषणा की गई है, जबकि कुछ श्रेणियों के लिए इसे 2500 रुपये तक बढ़ाने की संभावना भी जताई जा रही है। वहीं Himachal Pradesh में इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत अविवाहित महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की सहायता दी जा रही है।
इन योजनाओं का असर और भविष्य
विशेषज्ञों के अनुसार इन योजनाओं से महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ी है और वे घरेलू व सामाजिक फैसलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। हालांकि कुछ अर्थशास्त्री इन योजनाओं के लंबे समय तक चलने और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को लेकर सवाल भी उठाते हैं। इसके बावजूद, महिला कैश ट्रांसफर योजनाएं आज देश की सामाजिक नीतियों का अहम हिस्सा बन चुकी हैं और आने वाले समय में इनके और विस्तार की पूरी संभावना है।

















