उत्तराखंड में लाखों राशन कार्ड धारक दिसंबर महीने के सस्ते चावल का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। सरकारी गोदाम खाली पड़े हैं और दुकानों पर स्टॉक खत्म हो चुका है। यह समस्या पूरे राज्य को प्रभावित कर रही है, खासकर गरीब परिवारों को।

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चावल सप्लाई क्यों रुकी?
मुख्य वजह पोषणयुक्त चावल के विशेष दानों की कमी है। चावल मिलों ने धान से चावल तैयार तो कर लिया, लेकिन इन दानों को मिलाए बिना गोदामों में भेजना संभव नहीं। केंद्र के नए नियमों से खरीद प्रक्रिया जटिल हो गई है। गुणवत्ता जांच में देरी के कारण पूरी सप्लाई चेन ठहर गई। आमतौर पर महीने से एक हफ्ता पहले राशन पहुंच जाता है, लेकिन इस बार नवंबर अंत से ही रुकावट आ गई।
किन लोगों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?
राशन कार्ड धारकों के अलावा कई क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। कुछ दुकानदारों को नवंबर का चावल-गेहूं भी नहीं मिला, क्योंकि दोनों एक साथ उठाए जाते हैं। स्कूलों की मिड-डे मील योजना भी रुक गई, जहां बच्चे पोषण के लिए चावल पर निर्भर हैं। हल्द्वानी जैसे शहरों में हजारों परिवार परेशान हैं। दुकानों पर लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन हाथ खाली लौटना पड़ रहा है।
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सरकारी स्तर पर क्या हो रहा?
विभाग अधिकारी समस्या से अवगत हैं और तेजी से समाधान की कोशिश कर रहे। दिसंबर अंत तक गोदाम भरने का अनुमान है। डीलर संगठनों ने उच्च अधिकारियों से शिकायत की। अगर 20 दिसंबर तक सप्लाई न शुरू हुई तो जनवरी में दिसंबर-जनवरी का दो महीने का कोटा एक साथ बांटा जा सकता है। इससे डीलरों पर बोझ बढ़ेगा, लेकिन लोगों को राहत मिलेगी।
आगे क्या उम्मीद?
यह देरी पोषण योजना का हिस्सा है, जो चावल को विटामिन से भरपूर बनाती है। राज्य सरकार स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रही। लोगों से अपील है कि धैर्य रखें और आधिकारिक अपडेट चेक करें। भविष्य में ऐसी रुकावट न हो, इसके लिए खरीद प्रक्रिया सुधारने की जरूरत। कुल मिलाकर, यह अस्थायी समस्या लग रही, लेकिन गरीबों के लिए बड़ा झटका है। जल्द सामान्य होने की आशा।

















