सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में महंगाई भत्ते को बेसिक पे में मर्ज करने से साफ मना कर दिया है। 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से शुरू हो चुका है, लेकिन सैलरी बढ़ोतरी में देरी है। असली सवाल यह है कि बिना मर्जर के डीए कैसे शून्य हो जाएगा।

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मर्जर और एडजस्टमेंट में फर्क समझें
कई लोग मर्जर और एडजस्टमेंट को एक मान लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं। मर्जर यानी डीए का फिक्स हिस्सा बेसिक में हमेशा के लिए जोड़ देना, जो पुराने आयोगों में होता था। एडजस्टमेंट का मतलब पुराने बेसिक और जमा डीए को मिलाकर नई बेसिक बनाना, फिर डीए को जीरो से शुरू करना। 7वें आयोग ने इसी तरीके से काम किया।
7वें आयोग की पुरानी प्रक्रिया
पुराने बेसिक पे पर जमा डीए जोड़कर फिटमेंट फैक्टर से गुणा किया गया था, जो 2.57 था। नतीजा नई बेसिक सैलरी बनी और डीए तुरंत शून्य हो गया। जमा डीए गायब नहीं हुआ, बल्कि नई बढ़ी सैलरी में समा गया। यह तरीका सरल और प्रभावी साबित हुआ।
8वें आयोग में संभावित बदलाव
जब 8वां आयोग लागू होगा, तो नया पे मैट्रिक्स बनेगा जिसमें हर लेवल के लिए नई रकम तय होगी। मान लीजिए तब तक डीए 60 प्रतिशत तक पहुंच गया, तो पुराना बेसिक और डीए नए फिटमेंट फैक्टर से एडजस्ट हो जाएगा। कर्मचारी संगठन 3.68 फिटमेंट की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार वित्तीय स्थिति देखकर फैसला लेगी। डीए फिर जीरो से चलेगा।
कर्मचारियों को क्या फायदा मिलेगा
नई बेसिक बढ़ने से एचआरए, टीए और अन्य भत्ते ऊपर चढ़ जाएंगे। पीएफ, ग्रेच्युटी की गणना भी नई बेसिक पर आधारित होगी। डीए हर छह महीने में रिव्यू होगा। देरी के बावजूद 1 जनवरी 2026 का पूरा लाभ मिलेगा। निराशा की कोई बात नहीं, फायदा निश्चित है।

















